महाराष्ट्र के बिलढाना ज़िले में लोनार झील का पानी गुलाबी पाया गया। कहा जाता है कि पचास हज़ार साल पहले उल्कापिंड धरती से टकराया था तब इस झील का निर्माण हुआ था।

झील का पानी हुआ गुलाबी

पता लगा है कि ऐसा पानी के खारेपन के कारण हो सकता है और पानी में काई होने के कारण भी। विशेषज्ञ के अनुसार ये पहली बार नहीं हुआ है बल्कि पहले भी हो चुका है पर इतना साफ़ बदलाव पहले कभी नहीं दिखा। झील के संरक्षण ने बताया कि पानी के खारेपन का पीएच 10.5 है जिसके कारण पानी गुलाबी हो सकता है। इन्होंने कहा – “पानी में काई है। पानी के रंग बदलने की वजह खारापन और काई हो सकता है।” साथ ही उन्होंने कहा कि पानी में एक मीटर नीचे ऑक्सीजन नहीं है।

कोरोना वायरस के दौरान ही भारत में टिड्डियो का संकट आया। कुछ राज्यों ने भूकंप भी अनुभव किया और कही तेज़ चक्रवात भी हुआ और खारेपन के कारण पानी का लाल हो जाना ईरान में भी हुआ है।

लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा की यह साल ही ठीक नहीं है। एक व्यक्ति को बदलते रंग देख कर अपने किसी दोस्त की याद आ गई। पानी का लेवल भी कम हो गया है।

महाराष्ट्र के फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट को पानी का सेम्पल ले कर जाँच करने के लिए कहा है। कहा जा रहा है कि एक पिग्मेंट के पानी में पड़ने से भी पानी गुलाबी हो सकता है। онлайн займ