क्‍या आप जानते हैं अभिनेता राज कुमार का असली नाम? कैसे हुई उनकी मौत?

राज कुमार वह दिग्गज सुपरस्टार  थे जो ना केवल अपनी अदाकारी के लिए ही नहीं बल्कि अपनी आवाज़ और अपने अंदाज के लिए भी अपने प्रशंसकों के चहिते थे।लेकिन उनका असली नाम शायद ही ज़्यादा लोगों को मालूम हो। 23 साल पहले उनका निधन गले के कैंसर के कारण हुआ था। वह 3 जुलाई 1996, मैं 69 साल की उम्र में ही स्वर्ग सिधार गए थे। परन्तु, उनके फैंस के दिल में वह आज भी कहीं ना कहीं ज़िंदा है और हमेशा रहेंगे भी। उन्होंने फ़िल्म “रँगीली” जो की 1952 मे आयी थी उसके ज़रिये  फ़िल्मी जगत मे कदम रखा था लेकिन यह फ़िल्म कब आयी और कब परदे से उतर भी गयी पता ही नहीं चला।

उन्होंने बॉलीवुड मे कदम रखने का निर्णय तब लिया था जब उनके साथ काम कर रहे एक आदमी ने उन्हें सलाह दी। उसका कहना ये था की वह रंग, रूप और काठी मे अच्छे थे तो क्यों ना एक बार वो फिल्मो के लिए भी कोशिश करें। बस, फिर क्या था यह सुनने के बाद उन्होंने तुरंत अपनी नौकरी से इस्तफ़ा दिया और फ़िल्मी जगत की राह पर चल पड़े। इस दौरान उन्होंने 60 फिल्मो मे प्रदर्शन दिया।

वह उन हीरो मैं से एक थे जिसकी चमक पर सालो बीत जाने के बावजूद भी कोई असर नहीं पड़ेगा। कहा जाता है की उनका जन्म 8 अक्टूबर, 1929 मैं हुआ था। अगर आज के हिसाब से देखा जाये तो उनका जन्म स्थान पाकिस्तान का एक शहर बलूचिस्तान था। लेकिन उसके बाद वह भारत देश आ गए थे और यहाँ आकर ही उन्होंने फ़िल्मी जगत मे अपना कदम रखा था। ये भी कहा जाता है की फ़िल्मी जगत मे  कदम रखने से पहले वह सब-इंस्पेक्टर की नौकरी किया करते थे। वह ये नौकरी महिमा थाना मुंबई मे करते थे । उन्होंने अपने फ़िल्मी दौर के समय कई सारी सुपरहिट फिल्मे दी थी जिसके कारण लोग उन्हें असली ज़िन्दगी का राजकुमार मानने लग गए थे।

वह उस दौर से भी गुज़रे थे जहाँ केवल उनका नाम ही एक फ़िल्म को सुपरहिट बनाने के लिए काफ़ी था। इस बात को साबित करने के लिए हम आपके सामने कुछ फिल्मो के नाम भी लेकर आये है जैसे-  पैगाम, वक्‍त, नीलकमल, पाकीजा, मर्यादा, हीर रांझा, सौदागर इत्यादि। उनकी आखिरी फ़िल्म” गॉड एंड सन थी ” जो 1995 मे आयी थी।

क्या था उनका असली नाम?

 क्या आप यह बात जानते है की उनका राज कुमार नाम सिर्फ फ़िल्मी जगत के लिए था और असलियत मे उनका नाम कुछ और ही था। जी हाँ,  यह बात बिलकुल सच है उनका अलसी नाम “कुलभूषण पंडित ” था और यह वह नाम था जिसके द्वारा उनके चहिते लोग उन्हें पुकारते थे यानि उनके माता-पिता और उनके सगे सम्बन्धी, कुछ खास मित्र।

क्या थी उनकी आखरी इच्छा?

जैसे ही उनके कैंसर का खुलासा हुआ तब से ही उन्हें खाने पीने की दिक्कत होने लगी थी यहाँ तक की वह सांस भी सही से नहीं ले पाते थे। इसके कारण उन्हें अस्पताल मे भर्ती करा दिया गया था। जब वह अस्पताल मे थे और अपनी आखरी साँसे गिन रहे थे तब उन्होंने ने अपने के सामने अपनी आखिरी इच्छा का खुलासा करने का निर्णय लिया। उनकी आखिरी इच्छा को सुन कर आप भी हैरान रह जाएंगे।

उनकी आखिरी इच्छा था की उनके निधन होने के बाद,  पहले उनकी चिता के साथ पूर्ण रूप से क्रिया कर्म किया जाये उसके बाद ही इस खबर का खुलासा मीडिया मे किया जाये। उनका यह मानना था की मरने के बाद सबको बुलाना नौटंकी करने से कम नहीं होता है।

उम्मीद है की आपको हमारी आज की दास्तां बेहद पसंद आयी होंगी और कुछ नई चीज़े भी जानने को मिली होंगी। आगे भी ऐसे ही नए किस्सों के बारे मे जानने के लिए जुड़े रहे। अगली बार फिर मिलते है एक नये किस्से के साथ और अपना ध्यान रखना बिलकुल ना भूले।

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