फ़िल्म कंपनियों के नाम और प्रतीक चिन्हों की रोचक कहानियां

बॉलीवुड एक ऐसी फिल्म इंडस्ट्री है जहां न जाने कितनी फिल्में बनती हैं । कुछ फिल्में आपको हंसाती हैं तो कुछ रुलाती हैं । फिल्म की कहानी तो हमें पता चल जाती है पर फिल्म कंपनिओं के नाम और उनके लोगों से जुड़ी कहानियां हमसे अनजान ही रह जाती हैं।

जब हम कोई फिल्म देखते हैं तो अक्सर हमारे ज़हन  में यह सवाल आता होगा की यह फिल्म किसने बनाई है? और ये फिल्म किस प्रोडक्शन हाउस से बनी हुई है? उस प्रोडक्शन हाउस का नाम क्या है ? और उसका नाम यह क्यों रखा गया है?

राजश्री प्रोडक्शन

हम आपके हैं कौन, मैंने प्यार किया हम साथ -साथ हैं, प्रेम रतन धन पायो जैसी सुपरहिट फिल्में देने वाले राजश्री प्रोडक्शन का नाम पहले राज कमल रखा जाना तय हुआ था। पर फिर यह नाम कमल बड़जात्या और राज बड़जात्या की बहन राजश्री बड़जात्या के नाम पर रखा जाना तय हुआ और प्रोडक्शन हाउस का नाम राजकमल से बदलकर राजश्री प्रोडक्शन रख दिया गया। राजश्री प्रोडक्शन के लोगो में मां सरस्वती की फोटो बनकर आती है। इसका कारण यह है की प्रोडक्शन की शुरुआत करने वाले ताराचंद बड़जात्या जी सरस्वती मां के बड़े भक्त थे और उनकी पूजा किया करते थे। उनका मानना था की राजश्री प्रोडक्शन जो भी फिल्में बनाएगा वैसी होंगी जिन्हें पूरा परिवार साथ मिलकर देख सके।

आर के फ़िल्म और स्टूडियोज

आर के फ़िल्म की शुरुआत 1948 में राज कपूर ने की थी। आर के फ़िल्म और स्टूडियोज की पहली फ़िल्म ‘आग’ पर्दे पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई। दूसरी फ़िल्म ‘बरसात’ जो 1949 में आई थी सच में सफलता की बरसात ही लेकर आई थी। इसमे राज कपूर और नरगिस ने एक साथ काम किया था। बरसात के एक पोस्टर पर फ़िल्म का ही एक सीन लगा था। जिसमें राज कपूर ने एक हाँथ में नरगिस को पकड़ रखा था तो वहीं दूसरे हाँथ में एक वोइलन पकड़ रखा था। इसी सीन को फ़िल्म का लोगो बना दिया गया।

यश राज फ़िल्म्स

यश राज फ़िल्म्स ने बहुत बेहतरीन फिल्में बनाई हैं , ये एक ऐसा प्रोडक्शन हाउस है जो न्यू कमर्स को मौका देता है। यश चोपड़ा ने 1973 में पहली फ़िल्म बनाई थी जिसका नाम था ‘दाग’। कहा जाता है कि इस फ़िल्म की कामयाबी में राजेश खन्ना का एक बहुत बड़ा योगदान है। ऐसा भी माना जाता है कि ‘यश राज ‘में ‘राज’ राजेश खन्ना के नाम का हिस्सा है।

अंग्रेजी फ़िल्मों की प्रोडक्शन कंपनी और लोगो के बारे में फ़िल्म समीक्षक अर्णब बनर्जी कहतें हैं कि -” एम . जी. एम के लोगो में एक शेर है। जिसे 20वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था, इस कंपनी के जो मुख्य प्रचारक थे उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और उसके चिह्न यानी शुभंकर से प्रेरणा लेकर उन्होंने एम.जी.एम के लोगो में एक शेर को लगाया।”

‘का’ प्रोडक्शन

दीपिका के प्रोडक्शन हाउस का नाम है- ‘का प्रोडक्शन’ का प्रोडक्शन में ‘का’ का मतलब है -‘अंतरात्मा’ या आपका एक ऐसा हिस्सा या काम जो आपके जाने के बाद, इस दुनिया में रह जाता है। दीपिका भी यही चाहती हैं की उनके जाने के बाद उनका काम यहीं रहे और ऐसा काम करें जिससे लोग उन्हें याद रखें।

धर्मा प्रोडक्शन

बहुत सी कंपनियों ने अपनी पहचान सालों तक नहीं बदली पर कहते हैं ना- कि समय के अनुसार बदलाव जरूरी होता है। तो कुछ कंपनियां अपने लोगों में बदलाव लेकर भी आई हैं। करण जौहर की धर्मा प्रोडक्शन ने अपनी पहचान को बदला है। करण जौहर ने अपनी फिल्म -‘भूत -पार्ट वन: द हॉन्टेड शिप ‘ के प्रमोशन के लिए धर्मा प्रोडक्शन के लोगों में कुछ बदलाव किए। उन्होंने लोगों के रंग के साथ-साथ लोगो के पीछे आने वाले संगीत को भी डरावना बना दिया। प्रोडक्शन हाउस का लोगो उनकी पहचान होता है। कुछ प्रोडक्शन हाउस तो अभी भी फिल्में बना रहे हैं और कुछ मुंबई की चकाचौंध में कहीं गुम हो गए हैं। hairy girl


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