चरस के धुएं से निकली फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' की कहानी

हम अक्सर छोटे-छोटे बच्चों को कहानी सुनाने की ज़िद करते हुए देखते हैं। राजा-रानी, हाथी-घोड़े, भूत-प्रेत, और ना जाने कई तरह की कहानियां सुनना वो पसंद करते हैं। और सुनते सुनते वो कब नींद की गोद में चले जाते हैं, पता ही नहीं चलता। कभी कभी ऐसा भी होता है कि हम उनकी ज़िद पूरी करना चाहते हो, लेकिन खुद हमें ही कोई कहानी याद नहीं आती।

कभी कभी सच्ची घटना पर आधारित एक ऐसी कहानी सामने आ जाती, जो लंबे समय तक हमें याद रहती है। आज हम सच्ची घटना पर आधारित एक ऐसी ही कहानी के बारे में जानेंगे, जो इतने सालों बाद भी लोगों को पसंद आती हैं।

वह कहानी है सन 1971 में आई फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ की। अब आप यह सोचेंगे कि यह तो एक फिल्म है, फिर इसमें सच्ची कहानी कहां से आएगी। दरअसल इस फिल्म की कहानी कोई काल्पनिक नहीं बल्कि सच्ची घटना पर आधारित है। इस फिल्म को सत्तर और अस्सी के दशक के दिग्गज अभिनेता देवानंद साहब ने बनाई थी। यह फिल्म इतनी सुपरहिट हुई थी कि इस फिल्म का गाना ‘दम मारो दम’ आज भी लोगों की जुबान पर रहता है।

लोकप्रिय होने की वजह से इस गाने को आज के समय में पसंद किए जाने वाले संगीत और बदलाव के साथ फिर से दर्शकों के सामने पेश किया गया। लेकिन कहते हैं ना, सोना जितना पुराना होता है, उतना ही चमकता है। उसी तरह यह गाना भी है। इस गाने में नए जमाने के संगीत को जोड़कर बदलाव जरूर किए गए है, लेकिन शायद ऐसा करके भी यह हमारे दिलों को पुराने समय जैसा सुकून नहीं पहुंचा पाता। वैसे आज के समय में यह लहर चली हुई है कि पुराने गानों में बदलाव करके फिर से उन्हें दर्शकों के सामने परोसा जाए।

देवानंद और जेनिस की मुलाकात

खैर, हम अपना रुख मोड़ते है अपनी कहानी के तरफ़। इस फ़िल्म की कहानी एक ऐसी लड़की से जुड़ी हुई है, जो हिप्पी समाज के लोगों के बीच देवानंद साहब को मिली थी। बात उस समय की है जब आध्यात्म, तार्किक सोच, अहिंसा और आजाद ख़यालो में विश्वास रखने वाला हिप्पी कल्चर, भारत के खूबसूरत राज्य गोवा के साथ पड़ोसी देश नेपाल में भी अपनी जड़ें जमा रहा था। उन दिनों देवानंद साहब नेपाल में ही मौजूद थे। वहां उन्हें पता चला कि उनका एक जर्मन दोस्त भी डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए नेपाल आया हुआ हैं।

देवानंद साहब अपने उस दोस्त से जब मिले, तो बातों ही बातों में उन्हें पता चला कि कुछ ही दूरी पर हिप्पी कल्चर के लोग आए हुए हैं। इस समाज के लोगों को जानने की दिलचस्पी लिए देवानंद साहब भी वहां पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि चारों तरफ लोग चरस पी रहे है, ड्रग्स ले रहे हैं और ‘रॉक एंड रोल’ संगीत पर झूम रहे हैं। अचानक उनकी नजर उस भीड़ में एक लड़की पर पड़ी। चरस के नशे में झूमती वह लड़की हिप्पी समाज के लोगों के जैसी नहीं थी। देखने में वह लड़की बिल्कुल हिंदुस्तानी लग रही थी।

देवानंद साहब ने सोचा, कि ऐसी लड़की हिप्पी कल्चर की लोगों के बीच क्या कर रही है? उसके बारे में जानने की उत्सुकता लिए देवानंद साहब ने वहां के संयोजक से संपर्क किया और उस लड़की से अगले दिन मिलने का निर्णय लिया। अगले दिन जब वह लड़की उनसे मिली तो उसने अपने बारे में बताया।

भारतीय मूल की इस लड़की ने कहा, कि उसका नाम जसवीर है और प्यार से लोग उसे जेनिस बुलाते हैं। वह कनाडा में रहती है। जेनिस की अक्सर उसके मां से अनबन होती रहती थी। एक दिन वह अपनी मां के पैसे चुरा कर अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए नेपाल भाग कर आ गई थी। आजाद ख्यालों में विश्वास रखने वाली जसवीर उर्फ जेनिस ने देवानंद साहब को अपनी पूरी कहानी सुनाई।

जसवीर की कहानी पर फिल्म का निर्णय

भारतीय मूल की उस लड़की की कहानी देवानंद साहब को इतनी पसंद आई कि उन्होंने उसकी कहानी पर एक फिल्म बनाने का निर्णय ले लिया। साल 1971 में आई फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ इसी चरस पीते हिन्दुस्तानी मूल की लड़की की कहानी पर आधारित हैं। उस फिल्म में इस लड़की का किरदार दिग्गज अभिनेत्री जीनत अमान ने निभाया। मशहूर कलाकार प्रेम चोपड़ा, मुमताज, देवानंद और जीनत अमान के अभिनय से सजी यह फिल्म दर्शकों को बहुत पसंद आई थी।

हमारे आसपास अनेक रोचक कहानियां होती है। बस जरूरत है उन कहानियों को जानने, समझने, और महसूस करने की। भारतीय सिनेमा जगत से जुड़ी ऐसी ही रोचक कहानियों के लिए बने रहे हमारे साथ। कहानी पसंद आई हो तो इसे और भी लोगों को सुनाए। बॉलीवुड में ऐसे अनेक फिल्में है जो सच्ची घटना पर आधारित हैं। इसलिए हमें टिप्पणी करके यह बताना ना भूले, की आपको सच्ची घटना पर आधारित कौन सी फिल्म बहुत पसंद हैं। hairy girl


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