अपराधी से मसीहा बनने वाले व्यक्ति की कहानी

हम अपनी ज़िन्दगी में अनेक लोगों से मिलते हैं। कुछ अच्छे तो कुछ बुरे। एक तरफ जहां कुछ लोग ऐसे होते है जो अच्छाई की राह छोड़कर बुराई की राह पकड़ लेते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी होते है जो बुराई कि राह छोड़ अच्छाई की राह पकड़ लेते हैं। बैंगलोर के रहने वाले ‘ऑटो टी राजा’ ऐसे ही व्यक्ति है, जो एक समय में अपराधी थे, लेकिन आज वो हज़ारों बेसहारा लोगों के मसीहा हैं।

ऑटो टी राजा – एक परिचय

इनका जन्म मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। इनके पिता टेलीफोन लाइनमैन थे। वे बचपन से ही मां बाप के प्यार से वंचित रहे। खेलने, कूदने और पढ़ने की उम्र में ही बुरी आदतों की लत लग गई। इसकी वजह से उनका स्कूल से नाता टूट गया और वह बुरी संगत में फंसकर शराब पीने और जूआ खेलने लगे। उनकी इन हरकतों से परेशान होकर उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया। इसके बाद वे सड़कों पर जानवरों की तरह रहने को मजबूर हो गए। बस स्टैंड पर पड़े कचरे का डिब्बा ही उनका घर बन गया। उनका ना अपना कोई पता था और ना ही जीवन जीने की कोई योजना। बुरी आदतों ने उन्हें पूरी तरह अपने वश में कर लिया था। यही आदत उन्हें खींचते हुए 16 वर्ष की उम्र में चेन्नई तक ले गई।

होम ऑफ होप की स्थापना

जब वे चेन्नई पहुंचे तब वहां एक डकैती का हिस्सा बने। पुलिस ने उन्हें पकड़कर बाल सुधार गृह में भेज दिया। वहां जाकर उन्हें महसूस हुआ कि उन्होंने कितनी बड़ी गलती की है। यहीं से उन्होंने अपना जीवन सुधारने का निश्चय किया। जेल से निकलकर उन्होंने अपना जीवन यापन करने के लिए ऑटो रिक्शा चलाने का निर्णय लिया, और साथ ही जरूरतमंदों की मदद करने का निश्चय भी किया।

इसके बाद जब भी उन्हें सड़क पर कोई बेसहारा दयनीय स्थिति में दिखाई देता तो वह उसे अपने घर ले आते। उनके घावों को साफ करते, नहलाते, साफ कपड़े पहनाते और उन्हें खाना खिलाते। कुछ समय बाद एक चर्च से उन्हें ₹5000 और थोड़ी सी जगह दान के रुप में मिली। यहीं से उन्होंने ‘होम ऑफ होप’ की नींव रखी और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज 20 वर्षों से भी अधिक समय हो चुका है। होम ऑफ होप ने अब तक लगभग 11000 लोगों की मदद की है और 6000 से ज्यादा लोग शांति और सम्मान के साथ मृत्यु को प्राप्त हुए। वर्तमान में होम ऑफ होप ने लगभग 700 लोगों को आश्रय दिया है जिसमें 80 अनाथ बच्चे भी शामिल हैं। राजा उन बच्चों को स्कूलों में पढ़ने भी भेजते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें उम्मीद है कि एक दिन ये बच्चे अच्छे नागरिक बनेंगे और फिर वह भी जरूरतमंदों की मदद करेंगे।

हम अक्सर ऐसे अनेक लोगों से मिलते हैं, जिन्हें हम अच्छे से नहीं जानते, और कुछ ही समय में वे हमारे अच्छे दोस्त बन जाते हैं। धीरे धीरे जब हम उनके बारे में जानना शुरू करते हैं, तो पता चलता है कि वो इंसान जितना अच्छा दिखाई देता है, असल जिंदगी में वैसा बिल्कुल नहीं है। दूसरी तरफ ऐसा भी होता है कि जब हम किसी नए व्यक्ति से मिलते हैं, तो पहली मुलाकात में वह हमें पसंद नहीं आता। लेकिन जब वह हमारे साथ रहना शुरू करता है तब हमें उसकी बुराई और अच्छाई दोनों का पता चलता है। कई बार उसकी आदतें इतनी पसंद आती है कि हम उसकी बुरी आदतों को नजरअंदाज भी कर देते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि पहली मुलाकात में ही बिना किसी को जाने या समझे उसके व्यवहार पर उंगली नहीं उठाना चाहिए।

जरूरतमंदों को छत देने वाले राजा का अपना खुद का घर नहीं है। वे कहते हैं “आशा है ईश्वर मेरे लिए स्वर्ग में एक सुंदर सा घर बनाएंगे”। राजा कर्नाटक हो ऐसा राज्य बनाना चाहते हैं जहां कोई भी भिखारी या जरूरतमंद ना हो। एक अपराधी से जरूरतमंदों का मसीहा बनने वाले राजा की यह कहानी अगर आपको पसंद आई हो, तो इसे और भी लोगों तक जरूर पहुंचाएं। займы онлайн на карту срочно


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