गणेशजी को दूर्वा क्यों और कैसे चढ़ाते हैं?

हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, जैन, पारसी इत्यादि। यह धर्म किसने बनाएं कोई नहीं जानता, लेकिन इन धर्मों का गलत इस्तेमाल करना सबको आता है। देवी देवताओं और धर्म के नाम पर लोगों को लड़वाया जाता है। धर्म की संख्या तो उंगलियों पर गिन सकते हैं, लेकिन धर्म से संबंधित देवी देवताओं को उंगलियों पर नहीं गिन सकते हैं। अगर सिर्फ हिंदू धर्म की बात करें तो ऐसा माना जाता है कि हिंदू धर्म में करोड़ों देवी देवता हैं। अगर हम एक पंडित से भी हिंदू धर्म के सभी देवी देवताओं के नाम पूछे तो वह भी नहीं बता सकता। गिनती के सिर्फ कुछ ही देवताओं के नाम उसे भी याद होंगे।

गर्मी का मौसम है और कुछ ही दिनों में गणेश चतुर्थी आने वाली है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में जितने देवी देवता हैं, उन सबकी पूजा करने के लिए एक अलग विधि है, और उन सबको भोग लगाने के लिए भी अलग-अलग सामग्रियां है। आने वाली गणेश चतुर्थी के दिन जब गणेश जी की पूजा होगी तो उन्हें भी भोग में एक अलग चीज चढ़ाई जाती है। उसका नाम है दुर्वा। दुर्वा चढ़ाने के पीछे भी एक अलग कहानी है। यह कहानी शायद एक अंधविश्वास भी हो सकती है, लेकिन धार्मिक पंडितों के अनुसार सच्ची घटना पर आधारित है।

दुर्वा चढ़ाने के पीछे की कहानी

उज्जैन के भागवत कथाकार पंडित मनीष शर्मा के अनुसार पुराने समय में अनलासुर नाम का एक राक्षस था। इसके आतंक से सभी लोग डरे रहते थे। इसके आतंक को खत्म करने के लिए एक दिन गणेश जी ने इसे निगल लिया लेकिन उनके पेट में जलन होने लगी। इसके बाद ऋषियों ने उन्हें खाने के लिए दुर्वा दी। इसे खाते ही गणेश जी के पेट की जलन शांत हो गई। उसके बाद से ही गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।

पंडित शर्मा के अनुसार दूर्वा एक खास तरीके से चढ़ाई जाती है। किसी मंदिर के बगीचे या किसी साफ जगह से दूर्वा लेकर इसके 11 जोड़े तैयार किए जाते हैं और फिर इसे पानी से धोकर गणेश जी को चढ़ाया जाता है। चढ़ाते समय गणेश जी के 11 मंत्रों का जाप भी किया जाता है।

देश में ऐसे करोड़ों लोग हैं जो भगवान में विश्वास रखते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें भगवान में विश्वास नहीं रहता। भगवान में विश्वास रखना और ना रखना एक व्यक्ति की अपनी सोच होती है, लेकिन कभी-कभी यह विश्वास, अंधविश्वास भी बन जाती है। देश के अनेक हिस्सों में भगवान के नाम पर दंगे भी होते रहते हैं। अगर पुराणों की माने तो भगवान कहते हैं कि सभी लोग प्रेम से जीवन व्यतीत करो। तो फिर उनके भक्त आपस में लड़ते क्यों हैं?

अंधविश्वास एक बहुत खतरनाक चीज होती है। अभी देश में कोरोना महामारी फैली हुई है। यह एक बीमारी है जिसका सही इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है, लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश राज्य के कई जिलों में इस महामारी को भी देवी देवताओं से जोड़ दिया गया है। कई जगहों पर इसे कोरोना माता का नाम देकर पूजा की जा रही है और सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया जा रहा है। यह एक अंधविश्वास है, जो समाज और समाज के लोगों को हानि पहुंचाता है।

यह एक बहुत बुरा वक्त चल रहा है। बेहतर यही है कि हम सरकार के बनाए हुए नियमों को माने। अंधविश्वास ना रखते हुए खुद का ध्यान रखें, ताकि आने वाली गणेश चतुर्थी का हम अपने पूरे परिवार के साथ आनंद उठा सके। hairy woman


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