महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस समय पूरा देश कोरोना संकट से जूझ रहा है और ऐसे में अर्णब देश में दो समुदायों के बीच उन्माद और हिंसा भड़काने की कोशिश में लगे हैं।

अर्णब न्यूज़ चैनल को मिले लाइसेंस का दुरूपयोग कर रहे हैं। न्यूज़ चैनल के नाम पर किसी को कुछ भी बोलने की इजाज़त नहीं दी जा सकती है, अर्णब ने ब्रॉडकास्ट लाइसेंस का उल्लंघन कर सम्प्रदायिक उन्माद फैलाया।

सिब्बल ने कहा कि अभी तो एफआईआर दर्ज हुई है, पुलिस जांच करेगी और हो सकता है कि कई और धाराएं जोड़ीं जाएं, कई धाराएं गैरजमानती हैं, इस स्टेज पर आरोपी प्राथमिकी निरस्त करने की मांग कैसे कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अवमानना के एक मामले में राहुल गांधी निचली अदालत में पेश होते हैं, जबकि अर्णब को अदालत में पेश होने में दिक्कत महसूस होती है।

याचिकाकर्ता को आखिर ये छूट क्यों मिलनी चाहिए?  कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अर्णब के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, तो उसमें दिक्कत क्या है। राहुल गांधी ने भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से दायर मानहानि के मुकदमों को झेला है।

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