ऋचा कार : महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल

जब हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं तो हमारे मन में अधिकतर महिलाओं की एक ही छवि आती है, वह है कानूनी और सामाजिक अधिकारों के लिए लड़ते हुए। लेकिन 21वीं सदी में, हमें यह समझना होगा कि यह सशक्तिकरण सिर्फ सामाजिक आधार या कानूनी आधार पर नहीं होता, वह मानसिक आधार पर भी होता है। अगर हम मनोवैज्ञानिक तरीके से महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं कर सकते, तो चाहे कितनी ही कानूनी व्यवस्था आ जाए, लेकिन महिलाएं पीछे ही रहेंगी। उन्हें आगे लाने के लिए हमें समाज के प्रति उनका नजरिया बदलना होगा। और कुछ ऐसा ही करके दिखाया रिचा कार ने।

आज भी महिलाओं के लिए बाजार में, किसी दुकान से अंडर गारमेंट खरीदना मुश्किल हो जाता है। यदि दुकानदार पुरुष हो तो यह कठिनाई और बढ़ जाती है। इसी परेशानी को हल करने के लिए रिचा कार ने एक ऑनलाइन लॉन्जरे रिटेलिंग प्लेटफॉर्म बनाया, zivame.com। इस ऑनलाइन रिटेलिंग प्लेटफार्म से महिलाएं अपने लिए इनरवेयर बेफिक्र होकर अपने साइज, फैशन, ट्रेंड के अनुसार खरीद सकती हैं। यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उन महिलाओं के लिए आशीर्वाद से कम नहीं जिन्हें बाहर जाकर अंडरगारमेंट खरीदने में शर्म आती थी। परंतु, क्या आपको पता है इसकी शुरुआत कैसे हुई और इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को स्थापित करने के पीछे रिचा कार को कितनी मेहनत करनी पड़ी।

उनकी शुरुआत उतार-चढ़ाव से भरी रही और उन्हें अनेकों विरोध झेलने पड़े, बात यहां तक बढ़ गई थी कि, रिचा की मां ने भी उनका विरोध करना शुरू कर दिया था। समाज में हास्य का पात्र बनने की डर से, रिचा की मां ने उनका विरोध किया, परंतु इन सभी विरोधियों का सामना करके, अपनी मेहनत और लगन से रिचा ने यह साबित कर दिखाया कि नारी शक्ति किसी से कम नहीं और नारी जो चाहे वो कर सकती है।

आज हम रिचा की प्रेरणादायक कहानी के बारे में बात करेंगे, जिन पर यह कहावत बिल्कुल सत्य बैठती है;

“अगर आप सही हो तो कुछ भी साबित करने की कोशिश मत करो, बस आप सही बने रहो, एक दिन वक्त खुद गवाही दे देगा”

एजुकेशन एंड करियर

रिचा का जन्म 17 जुलाई 1980 को जमशेदपुर में हुआ था। वह एक बहुत ही पारंपरिक परिवार से आती हैं। उनके पिता टाटा स्टील में काम करते थे और उनकी मां एक ग्रहणी है। रिचा ने अपनी पढ़ाई सिविल इंजीनियरिंग में बिट्स पिलानी से पूरी करी है। सबसे पहले उन्होंने आईटी फॉर्म में काम करना शुरू किया परंतु उनका मन हमेशा से बिजनेस लाइन में आने का था, वह यह जानने में उत्सुक थी कि कोई व्यवसाय कैसे काम करता है, इसके बाद उन्होंने 2007 में NMIMS से एमबीए पूरा किया। एमबीए के बाद उन्होंने स्पेंनसर कंपनी में ब्रांड कम्युनिकेशन मैनेजर का पद संभाला और 1 साल बाद उनका प्रमोशन एरिया मैनेजर के रूप में हुआ। साल 2010 में वो SAP कंपनी के साथ एक सलाहकार के रूप में काम करना शुरू किया। जहां उन्होंने नेतृत्व के बारे में बहुत कुछ सीखा और उसके बाद उन्होंने zivame कंपनी की स्थापना की।

शुरुआत रही मुश्किल

इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद रिचा ने इंटरनेशनल लॉन्जरे से संबंधित कंपनी के साथ काम किया। इसी काम के दौरान उनका ध्यान इस बात पर गया कि महिलाओं के लिए बाजार से अंडर गारमेंट खरीदना कितनी मुसीबत की बात होती है। अगर कुछ बड़े शहरों को छोड़ दे, तो उस वक्त अन्य शहरों में अंडरगारमेंट्स के अच्छे ब्रांड तक नहीं पहुंचे थे। इन्हीं सब मुश्किलों को हटाने के लिए उन्होंने Zivame ऑनलाइन प्लेटफॉर्म स्टार्ट किया जहां महिलाएं अपने लिए इनरवेयर खरीद सकती हैं। इस कंपनी की शुरुआत 2011 में ₹35 लाख की पूंजी के साथ की, जो उन्होंने अपने दोस्तों परिवार वालों और अपनी सेविंग से जुटाया था।

रिचा को बिजनेस की शुरुआत करने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और यहां तक उन्हें अपनी नौकरी भी छोड़नी पड़ी। रिचा की मुश्किलें और बढ़ने लगी जब उनका, अपने ही घर में विरोध होने लगा क्योंकि उनकी मां को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं थी कि उनकी बेटी अंडरगारमेंट्स बेचती है। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए रिचा यह बताती है कि शुरू शुरू में उन्हें अपने बिजनेस के लिए जगह मिलना तक मुश्किल हो गई थी परंतु कैसे ना कैसे उन्हें अपने ऑफिस के लिए स्पेस मिला और उन्होंने काम आगे शुरू करना स्टार्ट किया।

ZIVAME और रिचा का सफर

 

रिचा ने अपनी कंपनी के लिए सबसे पहले नाम ZIVA सोचा था जिसका मतलब हिब्रू भाषा में “रेडियंस” होता है परंतु इस नाम के उपलब्ध ना होने के कारण उन्होंने ZIVAME नाम सोचा। रिचा के लिए यह काम आसान नहीं था। एक वेबसाइट को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वह सुबह 9:00 बजे से रात के 9:00 बजे तक काम करती थी, दोस्तों-रिश्तेदारों के लिए उनके पास टाइम नहीं था और यहां तक कि उन्हें अपने माता-पिता से बात करने का मौका भी कम मिलता था। काम के प्रति वो इतनी समर्पित और निष्ठावान थी कि उन्होंने अपनी शादी के लिए भी सिर्फ 1 दिन की छुट्टी ली थी और दूसरे दिन अपने काम पर पहुंच गई थी। उनकी मेहनत, लगन और परिश्रम ने ही आज ZIVAME को भारत का एक लीडिंग अंडरगारमेंट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बना दिया है।

वे अपने अनुभव को शेयर करते हुए बताती हैं –

“कंपनी शुरू करना एक चुनौती था परंतु पेपर वर्क करना आर्डर लोगों तक पहुंचाना उनके कॉल अटेंड करना उससे भी बड़ा काम था”।

आज एक अलग पहचान

रिचा मानती है कि खुद पर भरोसा ही सबसे बड़ी प्रेरणा स्रोत है और उनकी सफलता इस बात का सबूत है। रिचा की सबसे बड़ी चुनौती थी, समाज के पिछड़ी सोच, जिनकी वजह से उन्हें शुरुआती दिनों में कई बार हंसी का पात्र बनना पड़ा और उनका विरोध हुआ। परंतु रिचा ने अपने आत्मविश्वास से इन सभी कठिनाइयों को सरल और सहज बना दिया। रिचा आज, महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल बनकर समाज के सामने खड़ी हैं।

आज ZIVAME देश का नंबर वन ऑनलाइन, अंडरगारमेंट बेचने वाला प्लेटफार्म है। इसका रेवेन्यू साल दर साल 300% के आंकड़े के साथ बढ़ रहा है। 2011 में 35 लाख की पूंजी से शुरुआत हुई इस कंपनी कि आज टोटल रेवेन्यू 680 करोड के आसपास है। इस वक्त उनके ऑनलाइन स्टोर पर लॉन्जरी के 5000 से भी ज्यादा स्टाइल और लगभग 50 से ज्यादा ब्रांड और 100 से भी ज्यादा साइंस उपलब्ध है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटकर आज ZIVAME के बड़े-बड़े शहर, जैसे, दिल्ली, मुंबई, पुणे, आदि में स्टोर्स भी है। आज ZIVAME कंपनी भारत के सभी पिन कोड पर डिलीवरी करती है।

रिचा कार की कहानी यह दर्शाती है कि अगर आप किसी काम को मेहनत और लगन से करेंगे तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी। अपने जोश और जुनून को उन ऊंचाइयों तक पहुंचाइए जहां किसी का विरोधाभास ना पहुंच सके। समाज की मानसिकता से लड़ते हुए जो काम रिचा कार ने कर दिखाया है, वह आने वाले उद्यमियों के लिए एक मिसाल है। यह उनकी सफलता और मेहनत का ही नतीजा था कि साल 2014 में फार्च्यून इंडिया “अंडर 40” लिस्ट में उन्हें शामिल किया गया था।

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