'मुग़ले ए आज़म' के एक गाने के लिए बड़े गुलाम अली साहब ने ली लता मंगेशकर से 50 गुना फीस

कोई फिल्म निर्देशक किसी फिल्म को बनाने के लिए कितना जुनूनी हो सकता है, इसका अंदाजा आप के आसिफ साहब के जीवन से लगा सकते हैं। जो बॉलीवुड के इतिहास में सिर्फ एक ही फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने फिल्म मुग़ल ए आज़म को बनाने के लिए अपने आपको पूरी तरह से समर्पित कर दिया था। और इसी का परिणाम था कि ये फिल्म उस ज़माने की ही नहीं बल्कि हमेशा के लिए बॉलीवुड के इतिहास में अमर हो गयी।

वैसे तो आसिफ साहब ने फिल्म बनाने की कोई खास ट्रेनिंग तो नहीं ली थी। लेकिन उन्हें खुद पर भरोसा था। उनकी जिद के आगे तो सबको झुकना पड़ता था। आसिफ साहब ने तीन फिल्मे की थी। इनमे से पहली तो कुछ खास सफल नहीं हो पायी। तीसरी फिल्म पूरी नहीं हो पायी। लेकिन दूसरी फिल्म ‘मुग़ल ए आज़म’ एक कालजयी फिल्म साबित हुई।

फिल्म मुग़ल ए आज़म को बनने में पूरे चौदह साल लग गए थे। इस फिल्म के लिए कहा जाता है कि  आसिफ साहब हर एक सीन को जीवंत बनाना चाहते थे। और इसके लिए वे कुछ भी करने को तैयार रहते थे।  वे चाहते थे कि स्क्रीन प्ले में हर एक इमोशन वास्तविक लगे। फिल्म मुग़ल ए आज़म को लेकर बॉलीवुड की गलियों में कई सारी कहानियां भरी पड़ी हैं। आज हम आपके लिए एक ऐसी ही कहानी को लेकर आये हैं।  तो चलिए बिना वक़्त गंवाए शुरू करते हैं।

फिल्म मुग़ल ए आज़म में एक सीन था जिसमे तानसेन को गाते हुए फिल्माया जाना था। के आसिफ साहब चाहते थे कि वो गाना शास्त्रीय गायक उस्ताद बड़े गुलाम अली खान साहब खुद गायें। उन्होंने अपनी इस ख्वाहिश को मशहूर संगीतकार नौशाद साहब, जो खुद इस फिल्म में संगीत निर्देशक थे, के सामने रखी। नौशाद साहब बोले कि वे तो फिल्मों में गाने के सख्त खिलाफ हैं। यह सुनकर भी के आसिफ साहब नहीं माने और जिद पर अड़ गए कि वे गाने गवायेंगे तो सिर्फ उन्ही से।

नौशाद साहब ने बहुत कोशिश की, लेकिन बड़े गुलाम अली साहब नहीं माने। अंततः एक दिन नौशाद को साथ लेकर के आसिफ साहब खुद उनके घर पर जा पहुंचे। गुलाम अली साहब ने उन दोनों को देखकर नौशाद साहब से कहा “आपने इन्हे बताया नहीं कि मै फिल्म में गाना नहीं गाऊंगा।” इस पर के आसिफ साहब बोले “गाना तो आप ही गायेंगे”। यह सुनकर गुलाम अली साहब बोले “आप इस गाना के लिए अगर मुझे 25 हज़ार रुपये भी देंगे तो भी नहीं गाऊंगा।” इस पर के आसिफ साहब ने कहा “चलिए ठीक है, मै आपको 25 हज़ार 1 रूपये दूंगा, अब तो आप मना नहीं करेंगे”। आखिरकार के आसिफ साहब की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा और वे फिल्म में गाना गाने के लिए तैयार हो गए।

एक गाने के लिए ये काफी बड़ी रकम थी। उस ज़माने में बड़े से बड़े सिंगर को भी एक गाने के लिए 500 से 1000 रूपये तक मिलते थे। लिहाज़ा इतनी बड़े डील से बॉलीवुड में तहलका मचना तो तय था। इस बारे में जब नौशाद साहब ने के आसिफ से पूछा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा “मुग़ल ए आज़म जैसी फिल्मे हमेशा नहीं बना करती हैं। और फिर मुग़ल ए आज़म को देखते हुए ये कोई बड़ी रकम नहीं है”।   के आसिफ साहब की कही ये बात सच हुई।   यह फिल्म इतिहास में अमर हो गयी। इस फिल्म को बनाने में कुल सवा करोड़ खर्च हुए थे। वहीँ इस फिल्म ने तीन करोड़ से भी अधिक की कमाई की थी। микрозаймы онлайн


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