पुस्तक: डायल डी फॉर डॉन

 लेखक: नीरज कुमार 

अनुवाद: मदन सोनी 

प्रकाशन :पेंगुइन बुक्स इंडिया प्रा. लि.

डायल डी फॉर डॉन- पुस्तक समीक्षा

 यह पुस्तक “डायल डी फॉर डॉन” के लेखक पूर्व आईपीएस ऑफिसर नीरज कुमार है.वह दिल्ली के भूतपूर्व पुलिस कमिश्नर के रूप में दिल्ली के लोगों की सेवा कर चुके हैं.इस पुस्तक में उन्होंने जुर्म की दुनिया की तरह-तरह के मामलों  की पूर्ण व्याख्या की है और इसमें उनकी क्या भूमिका रही उसे भी दर्शाया है. इसमें कुल 11 चैप्टर्स है और यह सभी अपराध की कहानियां है.

यह कहानियां यानी अपराध पिछले समय में काफी ज्यादा चर्चित रहे हैं: टीवी,अखबार,रेडियो सभी पर इन अपराध और अपराधियों के बारे में चर्चा होती रही है.लेखक  ने अपनी पूर्ण याददाश्त का इस्तेमाल करते हुए इन केसज के बारे में पूर्ण व्याख्या की है,पुलिस और सीबीआई की भूमिका क्या रही उन्होंने किस तरह इन केसज को सुलझाया.लेखक ने देश की कई खुफिया एजेंसी के बीच समन्वय और एकाग्रता की कमी का भी वर्णन उन्होंने इस पुस्तक में किया है. कई बार यह एजेंसियां केसज सुलझाने में मदद करने की बजाय आपस में ही भिड़ जाती हैं. कई बार यह रूल तोड़ने से भी नहीं चूकते.

 पुस्तक का टाइटल डायल डी फॉर डॉन है. लेखक यानी पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने यह टाइटल इसीलिए रखा क्योंकि नीरज चोपड़ा की एक बार भारत में मोस्ट वांटेड क्रिमिनल दाऊद इब्राहिम से बात फोन पर हुई थी.यह किताब लेखक ने इसी बारे में लिखी है. उस समय वह दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के रूप में कार्यरत थे वह और उनकी टीम आईपीएल के दौरान चल रहे मैच फिक्सिंग की जांच कर रही थी तभी उन्हें कॉल आता है यह कॉल और किसी का नहीं बल्कि मोस्ट वांटेड क्रिमिनल दाऊद इब्राहिम का था. दाऊद इब्राहिम फोन पर कहता है”क्या साहेब आप रिटायर होने जा रहे हो अब तो पीछा छोड़ दो” क्योंकि मैच फिक्सिंग के पीछे कहीं ना कहीं दाऊद इब्राहिम का हाथ था. वह कॉल पहली बार नहीं इससे पहले भी नीरज कुमार की दाऊद से बात हुई थी, तब वह बात मुंबई धमाके को लेकर हुई थी जिसमें दाऊद ने इस हमले में उसका हाथ होने से साफ इनकार कर दिया.

 इस पुस्तक की सबसे अच्छी कहानी यही है कि दाऊद और पुलिस कमिश्नर की बातचीत और उसको पकड़ने के लिए पुलिस और बाकी एजेंसियों के प्रयासों का पूर्ण लेखन किया है. इसमें कई ट्विस्ट और टर्न देखने को मिलते हैं. इस पुस्तक में एक और रोचक कहानी है केरल के मूल प्रवासी थेक्कट सिद्दिकी के किडनैप की. इस पुस्तक में सीबीआई के उस प्रयास का भी वर्णन है,जो उन्होंने दुबई से याकूब मेमन के परिवार को भारत लाने के लिए किए थे. सीबीआई और आईएसआई के बीच जो मुठभेड़ और खेल खेला गया उसके बारे में भी बुक में लिखा है.

नीरज कुमार की यह किताब काफी रोचक है.उसे पढ़ने में बड़ा मजा आएगा वैसे भी असलियत जानने का अलग ही मजा है.आप जब इसे पढ़ना शुरू करेंगे तो शायद ही आप इसे बीच में छोड़ सकेंगे. अगर आपकी रुचि अपराधिक कथाओं में हैं तो यह बुक आपके लिए काफी मजेदार होगी.

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About the Author

Preeti

A resident of the beautiful city Delhi, Pursuing Journalism at Kalindi College. Love to read and write!

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