देवी सरस्वती के प्रमुख मंदिर और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

हमारे देश में अनेक धर्मों के लोग रहते हैं। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, जैन इत्यादि। सभी धर्मों के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं। हमारे देश में सबसे अधिक जनसंख्या हिंदू धर्म के लोगों की है। भारत में हिंदू धर्म के लोगों के लिए अनेक तीर्थ स्थान है, जहां लोग अपनी जिंदगी में एक बार अवश्य जाना चाहते हैं। भगवान शिव, श्री राम, हनुमान, देवी दुर्गा इत्यादि देवी देवताओं के ऐसे अनेक तीर्थ स्थान है जो भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। ऐसे अनेक तीर्थ स्थान हैं जो देवी सरस्वती को समर्पित हैं। तो आइए, मां सरस्वती का ध्यान करते हुए घर बैठे ही देश के अनेक हिस्सों में स्तिथ इन तीर्थ स्थानों के बारे में जानते हैं।

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर देवी सरस्वती की पूजा का विधान है। हम इसे वसंत पंचमी के रूप में पूरे देश में मनाते हैं। पुराणों के अनुसार प्राचीन काल के राजाओं ने देवी सरस्वती के मंदिर भारत के कई राज्यों सहित विदेशों में भी बनाए थे, क्योंकि उनका साम्राज्य वहां तक भी फैला हुआ था। उनमें से ही एक देश इंडोनेशिया भी है। वसंत पंचमी पर इन मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है।

श्री ज्ञान सरस्वती मंदिर – तेलंगाना

हमारे देश में देवी-देवताओं से संबंधित अनेक कहानियां प्रचलित हैं। एक ऐसी ही लोक कथा के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद महर्षि वेदव्यास ने देवी सरस्वती की तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी सरस्वती ने उन्हें दर्शन दिए थे। पुराणों में ऐसा माना जाता है कि दक्षिण भारत के तेलंगाना में जिस स्थान पर महर्षि वेदव्यास ने देवी सरस्वती की आराधना की थी, आज उसी जगह पर श्री ज्ञान सरस्वती मंदिर स्थित है। इस मंदिर से मां सरस्वती के करोड़ों भक्तों की भावना जुड़ी हुई है।

कोट्टयम का सरस्वती मंदिर – केरल

यह मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर है जो पूरे केरल में मां सरस्वती को समर्पित है। इस मंदिर को दक्षिण मुकांबिका मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। हमारे देश के लोग आज भी पुराणों पर विश्वास करते हैं। लोग अपनी निजी जिंदगी में भी हर काम ग्रह – दशा और भगवान की आस्था को ध्यान में रखकर करते हैं। यहां तक कि कौन सी वस्तु किस दिशा में रखनी है, इसका फैसला भी लोग ग्रह – दशा देखकर ही करते हैं। इस मंदिर में भी कुछ ऐसा ही है। यहां मां सरस्वती की प्रतिमा को पूर्व दिशा की ओर मुंह करके रखा गया है।

पूरा तमन सरस्वती मंदिर – बाली

हिंदू देवी देवताओं के मंदिर भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी स्थित है। इंडोनेशिया के बाली में स्थित पूरा तमन सरस्वती मंदिर एक ऐसा मंदिर है जो मां सरस्वती को समर्पित है। इस मंदिर में बना कुंड इसका खास आकर्षण केंद्र है। इस मंदिर में हर रोज संगीत के कार्यक्रम होते हैं।

श्रृंगेरी का मंदिर – कर्नाटक

पुराणों के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि कर्नाटक का श्रृंगेरी सरस्वती मंदिर श्री शंकर भागावात्पदा ने 7वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह मंदिर भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में स्थापित मूर्ति को लेकर कहा जाता है कि पहले यहां चंदन की मूर्ति होती थी, लेकिन बाद में उसकी जगह सोने की मूर्ति स्थापित कर दी गई।

मैहर का शारदा मंदिर – मध्यप्रदेश

भारत के मध्य भाग में स्थित मध्यप्रदेश के सतना जिले में त्रिकुटा पहाड़ी पर मां दुर्गा के शारदीय रूप देवी शारदा का मंदिर है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि आल्हा और उदल नाम के दो चिरंजीवी हजारों सालों से रोज देवी की पूजा कर रहे हैं। इस मंदिर से हिंदू धर्म के लोगों की खास आस्था जुड़ी हुई है और हर साल यहां हजारों लोग मां सरस्वती के दर्शन करने जाते हैं।

पुष्कर का सरस्वती मंदिर – राजस्थान

राजस्थान राज्य का नाम सुनते ही हमारी आंखों के सामने चारों तरफ रेत से भरे मैदान की तस्वीर उभर आती है। लेकिन अपने रेगिस्तानी क्षेत्र के साथ-साथ यह राज्य एक और वजह से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। राजस्थान के पुष्कर में विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है। ब्रह्मा मंदिर से कुछ दूर पहाड़ी पर देवी सरस्वती का मंदिर है। पुराणों की माने तो ऐसा कहा जाता है कि देवी सरस्वती ने ही ब्रह्माजी को सिर्फ पुष्कर में उनका मंदिर होने का श्राप दिया था। शायद यही वजह है कि भगवान ब्रह्मा जी का मंदिर देश के अन्य हिस्सों में देखने को नहीं मिलता। займ на карту онлайн


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