केरल में हथिनी की 'हत्या' पर मेनका गांधी ने कहा- वहीं के सांसद हैं राहुल गांधी, कार्रवाई क्यों नहीं की

मेनका गाँधी ने उठाई राहुल गाँधी पर ऊँगली!!कहाँ सांसद होकर भी नहीं उठा सकते लोगो की इस हरकत पर कदम!!

मेनका गाँधी ने  एक ऐसा कदम उठाया है जिसकी लोग बेशक़ वाहवाही कर सकते हैं। यह कदम मेनका गाँधी द्वारा सरकार के कुछ नहीं बोलने पर उठाया गया हैं। अभी दो दिन पहले ही घटित हुई दर्दनाक गर्भवती हथनी की हत्या से पूरा देश बौखला उठा है। यही नहीं बड़े-बड़े लोग जैसे रतन टाटा,  सुदर्शन पटनायक इत्यादि भी हथनी की हत्या पर अपना आक्रोश जता रहे हैं।

उनका मानना यह है कि लोग इतने निर्दयी कैसे हो सकते हैं। पहले ही हम उन पर इतना अत्याचार करके उनको चिड़ियाघर मे बंद रखते हैं और फिर उसके बाद उनकी इस कदर हत्या भी करते हैं। यह कोई साधारण मनुष्य के कर्म नहीं हो सकते है जिसको ऐसा करते हुए शर्म भी नहीं आती। हम आज इसी मुद्दे के बारे में आपको संक्षेप में बताने आए हैं। ताकि आप यह जान सके की सोशल मीडिया बुरा ही नहीं बल्कि हमारे देश के लिए बहुत ही अच्छा भी साबित हो सकता  है।

गर्भवती हथनी की दर्दनाक हत्या

अगर आप न्यूज़ देखने हैं तो शायद आप इस घटना से परिचित होंगे। परंतु, अगर आपको अपने व्यस्त कार्य काल की वजह से समय नहीं मिल पाता है तो हम आपको बताना चाहते हैं कि किस तरह उस हथनी की हत्या कर दी गई।

यह बात अभी कुछ ही दिन पहले की है। एक हथनी बेचारी भूख से दर-बदर भटक रही थी। वह किसी गांव में गई (मल्लापुरम गांव) और वहां के लोगों ने उसको खाने के तौर पर अनानास दे दिए। लेकिन शायद ही उस हथनी को यह ज्ञात हुआ था कि वह उसकी भूख नहीं बल्कि उसको जान से मिटाना चाहते हैं। और इसके लिए उन्होंने उसे मारने की पूरी प्लानिंग पहले से ही कर रखी हैं, आखिर खुद ही उनका शिकार उनके पास चल कर आया था।

उस अनानास में उन राक्षसों ने बम रख रखे थे जिसकी वजह से जब उस हथनी ने अनानास को खाया तब उसके मुंह में ही वह दग गये। मुंह में दगने की वजह से उसका पूरा जबड़ा फट गया और वह बिल-बिलाती हुई वहां से भाग आई। वहां से आने के दौरान उसने किसी को भी चोट नहीं पहुंचाई। परंतु, वह जख्मी गर्भवती हथनी एक नदी के बीच में जाकर खड़ी हो गई। शायद उस ठंडे पानी से उसकी उस चोट को आराम मिल रहा होगा। कुछ देर तक वो ऐसे ही खड़ी रही और फिर उसने अपने प्राण त्याग दिए। यह घटना सुनकर तो आपकी आंखों में भी जरूर आंसू आ गए होंगे।

जिला मल्लापुरम की वारदात:

यह जिला असली भक्षियों से भरा हुआ है क्योंकि यहाँ के लोगों को अपने अलावा कोई और जिंदा मनुष्य बर्दाश्त नहीं होता। इसी वजह से भले ही वह जानवर हो,  चिड़िया हो, यहां तक कि इंसान ही क्यों ना हो। सबको ज्यादा से ज्यादा तादाद मे जहर देकर या किसी अन्य तरीके से उसकी जान ले लेते हैं। और इस दर्दनाक घटना के बाद यह जिला अब लोगों के दिलों में एक जहर बन कर बैठ गया है।
जब से यह हथनी वाला कांड हुआ है तब से लोग इस जिले को लेकर इतना गुस्सा है जिसकी कोई सीमा नहीं। वह चाहते हैं कि जल्द से जल्द इस जिले के लोगों के ऊपर कार्रवाई की जाए। किसी भी इंसान को इतना हक नहीं है कि वह हमारी धरती को इस कदर नुकसान पहुंचा कर उसे बर्बाद करें।

बीजेपी की सदस्य मेनका गांधी ने उठाया कदम

गुस्से से भरे लोगों की भीड़ में से मेनका गांधी भी एक सदस्य हैं जिन्होंने हथनी वाली दुर्घटना पर अपना गुस्सा जताया हैं। उन्होंने साफ राहुल गांधी के ऊपर उंगली उठा दी और कहा कि वहां के सांसद होने के बावजूद भी क्या उनके अंदर इतना बल नहीं कि वह लोगों की हरकतों को काबू कर पाए। इसी गुस्से को प्रकट करने के लिए उन्होंने ट्वीट भी किया था। आखिर कोई भी व्यक्ति क्यों ना हो, इस घटना के बाद उसको इतना गुस्सा आना आम बात है।

हर दूसरे दिन हाथियों की हत्या, उसके बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं

क्यों तमिलनाडु की सरकार उन लोगों के ऊपर लगाम नहीं लगाती जो इस कदर हर दूसरे दिन हाथियों की हत्या कर रहे हैं। यहां तक कि दूसरे प्रदेशो के लोग भी  वहां के फॉरेस्ट ऑफिसर से इन लोगों के बारे में शिकायत कर चुके हैं और उन्होंने उनकी रिपोर्ट भी दर्ज करा रखी हैं। इतना होने के बाद भी सरकार का उन लोगो के हित मे कोई जवाब नहीं आता।

इतना सब होने के बाद अब लोगो का मानना यह है कि भले ही आप कितना भी शिकायत कर लो सरकार कोई कदम नहीं उठाती है। और जनता भी अब यह बात नहीं समझ पा रही हैं कि वह ऐसा क्यों करती है?। अगर वो चाहे तो उन लोगों के ऊपर लगाम कस सकती है और इतने निर्दयी कामों के लिए दंड भी दे सकती हैं।
इतना सब देखने के बाद अब लोगो को लगने लग गया हैं की शायद वहां की सरकार उन लोगो से डरती हैं। यही कारण है की कोई उनकी तरफ आंख उठाकर देखने की भी हिम्मत नहीं करता।

जंक लगी कील और पानी में डुबोकर करते हैं हाथियों की हत्या

आखिर कोई भी इंसान इस सीमा तक कैसे गिर सकता है? क्या उन लोगों के पास दिल नहीं जो इस कदर ना बोल पाने वाले जानवरों के ऊपर अत्याचार करते हैं? वहां के लोगों के लिए यह सब अब एक ट्रेंड बन चुका है। इसके तहत उन्होंने ऐसे नियम बना रखे हैं जिसके अनुसार जिसने ज्यादा हाथियों को मारा,  उसको उतना ही ज्यादा इंश्योरेंस मिलेगा। इसी वजह से हर साल वहां पर तकरीबन 600 हाथी मार दिए जाते हैं।

जैसा कि आप नाम पढ़कर समझ ही चुके होंगे कि उन बिचारे हाथियों को जंक लगी कीलों को उनके शरीर पर ठोककर या पानी में डुबोकर मार दिया जाता है। वह जिस कदर उनपर अत्याचार करते हैं वैसा अगर किसी इंसान पर किया जाता तो पता नहीं वह उन्हें कितनी बद्दुआ देता। हम आशा करते हैं की हमारी सरकार इस मुद्दे पर कड़ी करवाई ज़रूर करेंगी।

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