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मिट्टी की गुल्लक: इस गुल्लक में हर घर की कहानियां संभालकर रखी हुई हैं

  • पुस्तक: मिट्टी की गुल्लक
  • लेखिका: संगीता झा
  •  प्रकाशन: डायमंड बुक्स

ना जाने कितने किस्से संभाले हुए हैं यह “मिट्टी की गुल्लक”

 पुस्तक “मिट्टी की गुल्लक”की लेखिका डॉ संगीता झा है. संगीता झा हैदराबाद की मशहूर एंड्रोकन सर्जन है. उनकी पुस्तक “मिट्टी की गुल्लक” कहानियों का संग्रह है जिसमें कुल 21 कहानियां संग्रहित है. यह कहानियां काफी रोचक और लुभावनी है. इस पुस्तक में लेखिका की कृति मुन्नी के जन्म से लेकर उसके बचपन, उसकी किशोरावस्था और विवाह से लेकर मां बनने तक का सफर गड़ा हुआ है. उसके जीवन में आने वाले सभी उतार- चढ़ाव का वर्णन इस पुस्तक में किया हुआ है. लेखिका इसे कहानियों का संग्रह कहती है लेकिन मेरे हिसाब से इसे उपन्यास, बायोग्राफी कहना ज्यादा उचित रहेगा. परंतु अब यह कहानी संग्रह के रूप में प्रकाशित है तो हम कौन होते हैं इसे उपन्यास या कुछ और कहने वाले.

 इस पुस्तक में जो कहानियां लेखिका ने लिखी है वह लोगों को अपने साथ शुरुआत से लेकर अंत तक बांधने में सफल रही है. अगर कुछ शब्दों में बात करें तो लेखिका की कृति मुन्नी एक बहुत ही शरारती और चंचल बच्ची है और तरह-तरह के कारनामे कर पूरा घर सिर पर उठाए रखती है और जब लेखिका अपनी किशोरावस्था से गुजरती है तो वह चीजों को अलग ही दृष्टि से देखने लगती है और हमेशा उसके मन में प्रश्नों की बौछार सी रहती है.

मुन्नी के पिता के साथ संबंधों में जटिलता व नए-नए लोगों का जीवन में आना उन्हें अपनाने में कठिनाई उन सभी चरित्रों का विश्लेषण है यह सभी कारण है जो पढ़ने वाले को शुरुआत से लेकर अंत तक अपने साथ बांधे रखते हैं.

किताब में एक से एक रोचक किस्से हैं जो आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकने में सक्षम है जैसे जहां मुन्नी अपनी सहेलियों से झूठ बोलती है कि सायरा बानो उसके रिश्तेदार है और फिर उस झूठ को सच करने के लिए वह अपनी बुआ को ही सायरा बानो बना देती है. इसके अलावा एक और ऐसा किस्सा है जिसमें मुन्नी और उसका भाई दोनों मिलकर गुल्लक में पैसे जोड़ते हैं पर झगड़ा हो जाने पर मुन्नी गुल्लक के पैसे लेकर मेले में जाकर तब तक झूला झूलती है जब तक सारे पैसे खत्म नहीं हो जाते और जब भाई उसे गुल्लक व पैसों के बारे में पूछता है तो वह चोरी होने का बहाना बना देती है.

इनके अलावा कुछ ऐसे भी किस्से हैं जो आपकी आंखें भर सकते हैं ऐसे किस्से ज्यादातर बाबूजी से जुड़े हुए हैं. इस कहानी संग्रह में मुन्नी के बाबूजी काफी गुस्सैल,सनकी व्यक्तित्व वाले हैं मुन्नी और उनका रिश्ता बेहद प्यार वाला नहीं है. लेखिका ने इस चरित्र को बड़ी ही नाजुकता के साथ चित्रित किया है और लेखिका इस चरित्र को दर्शाने में सफल भी रही है जिसके लिए वह तारीफ के काबिल है कहानी में कुछ ऐसे पात्र हैं जो अच्छे बुरे दोनों ही किरदार निभा रहे हैं जैसे सुखबत्ती,अम्मा,बालू चाचा, चौधराइन चाची आदि.

 लेखिका ने कहानी लिखते समय काफी सहज व सरल भाषा का प्रयोग किया है.पूरी कहानी संग्रह सादगी के साथ लिखा हुआ है. लेखिका ने बिना किसी ताम – झाम के यह कहानी संग्रह पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है. मुझे तो यह कहानी संग्रह काफी पसंद आया और इसके कई किस्से काफी अद्भुत है जो हमेशा स्मरणीय रहेंगे.

आपको भी यह किताब कम से कम एक बार तो पढ़नी चाहिए. इस किताब की खूबी इसकी सरलता व सादगी है जो की बहुत ही खूबसूरती के साथ कहानी बतलाती है. यह कह सकते हैं कि “हर घर के ना जाने कितने किस्से यह मिट्टी की गुल्लक अपने में संजोकर रखे हुए हैं”.


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