पुस्तक – लाला हरपाल के जूते और अन्य कहानियाँ

 लेखक – सुभाष चंद्र कुशवाहा 

 प्रकाशन – पेंगुइन बुक्स

लाला हरपाल के जूते और अन्य कहानियाँ – पुस्तक समीक्षा

 पुस्तक “लाला हरपाल के जूते और अन्य कहानियों “के लेखक सुभाष चंद्र कुशवाहा है. लेखक इस पुस्तक के जरिए उन गांववालों को दर्शा रहे हैं जो तेजी से ग्लोबलाइजेशन को अपना रहे हैं लेकिन गांव के लोग जितनी भी कोशिश कर ले वह पूरी तरह ग्लोबल नहीं हो सकते उनके अंदर बसा गांव कभी भी उनके दिल से बाहर नहीं निकल सकता.

लेखक ने लाला हरपाल के जरिए इसी की व्याख्या की है लेखक का किरदार लाला हरपाल गांव में रहने वाला एक ग्रामीण व्यक्ति है जिसका दामाद अमेरिका में रहता है और जब एक बार उसका दामाद उसके लिए अमेरिकी जूते लाता है तो जूते पहनकर लाला हरपाल का मिजाज बिल्कुल बदल जाता है लेकिन बाद में जब उसके अमेरिकी जूते गांव में रहने वाली चितकबरी कुत्तिया चीर-फाड़ देती है तो वह दोबारा अपने रबर-टायर से बनी हुई पुरानी चप्पलों पर वापस आ जाता है.

 इस कहानियों के संग्रह में लेखक की अधिकतर कहानियां उत्तर प्रदेश के गांव की है. लेखक इन कहानियों के जरिए 90 के दशक के बाद आए गांव के बदलावों को वर्णित करता है. वह बताता है कि जैसे-जैसे बदलाव हो रहे हैं,वैसे-वैसे गांव में रहने वाले लोगों में भी बदलाव आ रहे हैं. कुछ हिस्सा इन बदलावों को स्वीकार नहीं कर रहा है वह वही पुरानी पीढ़ियों की व्यवस्था के साथ चल रहे हैं और उन्हें कभी बदलना नहीं चाहते.लेकिन वही एक बड़ा तबका ऐसा भी है जो इन बदलावों को अपना कर आगे बढ़ रहा है.

लेखक आगे राजनीति का उदाहरण देता है कि पहले लोग अपनी जातियों को ही वोट देते थे और उन्हीं की सरकार बनती थी,वही सत्ता संभालते थे लेकिन समय के साथ-साथ जनता भी जागरूक हो रही है अब वह उसी को वोट देती है जो देश के लिए कार्य करता है और जो लोग आरक्षण पाकर मंत्री बने हैं वह भी अपनी सीट बचाने में लगे हुए हैं. अब तो महिलाएं भी जागरुक हो रही हैं और हर क्षेत्र में परचम लहरा रही है.

इसी पुस्तक में एक और कहानी वर्णित है कहानी का नाम है: “रमा चंचल हो गई” इस कहानी की नायिका का नाम रमा है जो अपने ही गांव की प्रधान है जिसमें उसका पति उसके नाम का इस्तेमाल करके गड़बड़ी करता है जिसे वह जान लेती है और प्रधानी छोड़ने की धमकी देती है. ऐसी ही एक और कहानी पुस्तक में संग्रहित है कहानी का नाम है “प्रजा रानी बनाम कउवाहंकनी” भोजपुरी में सुनाई जाने वाली लोककहानी कउवाहंकनी के माध्यम से लेखक ने राजनीति पर बड़ा प्रभाव किया है.

आगे लेखक की कहानी सब कुछ जहरीला है में लेखक ने गांव में बढ़ रहे शराब के नशे में डूबे हुए लोगों को चिन्हित किया है. कहानी वहीं केहू ना चीन्ही,भटकुंइयां इनार का खजाना, बात थी उड़ती जा रही, जर-ज़मीन-जिनगी, रात के अंधियारे में,ये कहानियां गांव की असली सच्चाई को चित्रित करती है.

 लेखक इन कहानियों के माध्यम से गांव की वास्तविकता से हमारा परिचय कराना चाहता है.यह काफी साहसी प्रयास है जो लेखक द्वारा किया गया है. अच्छी बात तो यह है कि ऐसा बिल्कुल नहीं लगता की कहानी बनाई हुई है यह बिल्कुल वास्तविक कहानी लगती है. यह कहानियां हर किसी को पढ़नी चाहिए ताकि वह गांव की वास्तविकता से रूबरू हो सके.

About the Author

Preeti

A resident of the beautiful city Delhi, Pursuing Journalism at Kalindi College. Love to read and write!

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