लेखिका: एलिस एक्का

 प्रकाशन:राधाकृष्ण प्रकाशन 

 संपादक:वंदना  टेटे

पुस्तक समीक्षा: एलिस एक्का की  कहानियाँ

 एलिस एक्का जानी-मानी कथाकार है. वह पहली महिला आदिवासी हैं जिन्होंने लेखिका के तौर पर लिखना शुरू किया. इससे पहले हमें साहित्य और उपन्यासों के इतिहास में किसी भी महिला आदिवासी कथाकार का जिक्र नहीं मिलता.एलिस एक्का पहली महिला आदिवासी है जिन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की.एलिस एक्का का यह इकलौता कहानियों का संग्रह है. लेखिका ने कहानियां लिखते वक्त इस बात का ध्यान रखा है की कहानियां ज्यादा बड़ी ना हो. संग्रह में हमें छोटी-छोटी कहानियां ही मिलेंगी लेकिन इन छोटी कहानियों में गहरे मायने छुपे हैं.कहानियां छोटी होने के बावजूद हमें बड़े-बड़े संदेश देती है.

लेखिका की कहानी संग्रह में कुल 6 कहानियां हैं “वनकन्या”,”दुर्गी के बच्चे और अल्मा की कल्पनाएं”,”सलगी जुगनू और अंबा गाछ”,”कोयल की लाडली सुमरी”,”15 अगस्त”,”बिलचो और रामू”, और “धरती लहराएगी, झालो नाचेगी गाएगी”.

लेखिका ने अपनी कहानियों में स्त्री और प्रकृति पर अधिक जोर दिया है. लेखिका की कहानियों में इंसान के सभी भागों का बहुत ही सुंदर चित्र देखने को मिलता है भावनाओं के साथ ही उन्होंने प्रकृति पर भी उतनी ही रुचि दिखाई है चाहे वह पेड़-पौधे,फल-फूल, पक्षी,जानवर,पहाड़, नदी, झरने, जंगल आदि हो  सभी का बहुत ही खूबसूरत वर्णन किया है.पुस्तक की पहली कहानी “वनकन्या” है जहां एक युवक हमले में घायल हो जाता है. वनकन्याएं उस युवक को अपने घर ले आती हैं और उसकी देखरेख करती है बाद में वनकन्या फेचो और उस युवक में प्रेम होता है. लेकिन वनकन्या जंगल को छोड़कर युवक के साथ शहर नहीं जाना चाहती. लेखिका इससे फेचो का जंगल के प्रति लगाव दिखाती है.दूसरी कहानी है “दुर्गी के बच्चे और अल्मा की कल्पनाएं” इस कहानी में एक दलित महिला है,जिसका नाम दुर्गी है साथ ही आदिवासी महिला भी है जिसका नाम अल्मा है.यह कहानी दलितों व आदिवासियों के साथ हो रहे भेदभाव को दर्शाती है.अगली कहानी है”सलगी जुगनू और अंबा गाछ” इस कहानी में दो बच्चे हैं जिनका नाम सलगी और राजू होता है जो एक दूसरे से प्रेम करते हैं लेकिन इस कहानी का अंत बड़ा ही दुखद होता है. “कहानी कोयल की लाडली सुमरी” एक उछल कूद वह हंसने खेलने वाली लड़की है जिसके साथ बलात्कार जैसा  भयानक अपराध होता है. लेकिन उसमें सुमरी का कोई दोष नहीं होते हुए भी समाज उससे ही दोषी ठहराता है. सुमरी एक शिशु को अपने अंदर संभाले हुए हैं लेकिन   यह समाज उसकी जान तक लेने के लिए उतारू है.सुमरी इसका विरोध करती है.क्या सुमरी अपने बच्चे को बचा पाएगी?”धरती लहराएगी,झालो नाचेगी गाएगी” में भुखमरी व उससे प्रभावित हो रहे लोगों का जिक्र है.

लेखिका की कहानी समाज की असली सच्चाई दिखाती है. कहानियां यथार्थ का वर्णन करती है जिससे लोगों को बोरियत भी महसूस नहीं होती. बिना किसी को गलत ठहराए लेखिका ने अपनी बात सहजता से पाठकों के सामने रखी है कहानियों में सहजता और सरलता देखने को मिलती है.

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About the Author

Preeti

A resident of the beautiful city Delhi, Pursuing Journalism at Kalindi College. Love to read and write!

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