हमारी इम्यूनिटी किस तरह काम करती, आइये जानतें हैं

जब हम किसी बीमारी के गिरफ्त में आते हैं तो उसका मुख्य कारण होता है बैक्टीरिया और वायरस का शरीर में फैलना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी कोशिकाएं जिनसे हमारा पूरा शरीर निर्मित हुआ है, वह कोशिकाएं कैसे हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को हमारे शरीर में फैलने से रोकती हैं और हमें बीमार होने से बचाती हैं? आज हम आपको यही बताएंगे कि बैक्टीरिया और वायरस से हमारी कोशिकाएं कैसे लड़कर हमें बीमार होने से बचाते हैं।

जब हम किसी बीमारी की गिरफ्त में आने लगते हैं तो सबसे पहले हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी की बात होती है, कि हमारा इम्यून सिस्टम कितना मजबूत है। हमारे इम्यून सिस्टम जितना मजबूत होता है उतना ही हमारे बीमार होने के कम चांस होते हैं। और हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए हमारे शरीर की कोशिकाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हम सभी जानते हैं कि हमारी पूरी की पूरी बॉडी न जाने कितनी छोटी छोटी कोशिकाओं से ही मिलकर बनी हुई है, यह कोशिकाएं ही हमारे शरीर के लिए एंटीबायोटिक का काम करतीं हैं। जब हमारी कोशिकाएं किसी घातक बैक्टीरिया या वायरस से लड़ने में सक्षम होती हैं तभी हमें इलाज के लिए किसी डॉक्टर के पास जाना होता है। जब तक हमारी कोशिकाओं में सुधार तक वायरस का बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता रहती है तब तक हम बीमार नहीं होते लेकिन जैसे ही हमारी कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं, ठीक उसी समय हमारा शरीर उस घातक बैक्टीरिया या वायरस की चपेट में आ जाता है और हम बीमारी की गिरफ्त में आने लगते हैं। चलिए आज हम आपको बताते हैं कि हमारे कोशिकाएं जिसे हम अंग्रेजी में सेल कहते हैं किस तरह काम करतीं हैं।

इनेट इम्युनिटी और अडेप्टिव इम्युनिटी कैसे काम करतीं हैं ?

मानव शरीर में दो तरह की इम्युनिटी होती हैं। पहली इनेट इम्युनिटी और दूसरी अडेप्टिव इम्युनिटी। दोनों मिलिट्री अपने अपने तरीके से काम करती हैं दोनों का काम करने का भी तरीका एकदम अलग है और दोनों मिलकर हमारे शरीर को मजबूत बनाए रखती है। इन्हीं मिलिट्री की वजह से हम यानी हमारा शरीर स्वस्थ रहता।

चलिए अब आपको बताते हैं कि इनेट इम्युनिटी क्या होती है? इनेट इम्यूनिटी का काम बहुत ही महत्वपूर्ण होता है या इम्यूनिटी हमारे शरीर में तब एक्टिव होती है जब कोई खतरनाक बैक्टीरिया या वायरस हमारे शरीर में प्रवेश करता है और हमारे शरीर को क्षति पहुंचाने की कोशिश करता है तो इनेट इम्युनिटी उस खतरनाक बैक्टीरिया या वायरस को खत्म करने का काम करती है। और उस बैटरी डे को खत्म करके इनेट इम्युनिटी हमें उस बैक्टीरिया द्वारा होने वाली खतरनाक बीमारी से बचा लेती है।

अब आप सोचेंगे कि इनेट इम्युनिटी हमारे शरीर में कैसे आती है कैसे नहीं आती तो चलीए इसके बारे में भी आप बताते हैं। दरअसल इनेट इम्युनिटी प्राकृतिक तौर पर ही हमारे शरीर में मौजूद रहती है। यानी जब हम जन्म लेते हैं तभी से भयानक बैक्टीरियों और वायरसों से हमारे शरीर को बचाने के लिए इनेट इम्युनिटी काम करना शुरू कर देती हैं। इनेट इम्युनिटी में 7 तरह की सेल्स यानी कोशिकाएं काम करती हैं। इन सभी सातों कोशिकाओं यानी सेल्स का अलग-अलग काम होता है। जैसे जब हमारे शरीर में कोई भी खतरनाक वायरस या बैक्टीरिया प्रवेश करता है तो प्रारंभिक स्तर पर मोनोसाइट्स और मास्ट सेल्स बैक्टीरिया या वायरस की पूरी जानकारी जुटाई जाती हैं और ऐसे केमिकल रिलीज करती हैं ताकि जहां वायरस है उस वायरस को खत्म करने के लिए अधिक से अधिक इम्युनिटी सेल्स पहुंच सकें।

जब मोनोसाइट्स और मास्ट सेल्स बैक्टीरिया या वायरस का मैसेज पहुचां देते हैं तो उसके बाद न्यूट्रोफिल्स, इस्नोफिल्स,बेसोफिल्स और नैचरल किलर सेल्स यानी कोशिकाएं आकर उन खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने का काम करती हैं। इतना ही नहीं न्यूट्रोफिल्स, इस्नोफिल्स,बेसोफिल्स और नैचरल किलर सेल्स उस खतरनाक वायरस या बैक्टीरिया से हुए नुकसान की भरपाई भी करती हैं।

बैक्टीरिया या वायरस का प्रवेश

जब हमारे शरीर में बैक्टीरिया या वायरस प्रवेश करता है तो सबसे पहले बैक्टीरिया और वायरस के पास मोनोसाइट्स सेल्स यानी कोशिकाएं पहुंचती हैं जिनकी संख्या सबसे अधिक होती है। और उसके बाद न्यूट्रोफिल्स पैथोजेन (वायरस या बैक्टीरिया) को खाकर उस बैक्टीरिया या वायरस को खत्म कर देती हैं। और अगर बैक्टीरिया या वायरस ज्यादा ख़तरनाक है तो न्यूट्रोफिल्स की मदद बेसोफिल्स सेल्स पहुंचती हैं और दूसरे सेल्स को बुलाकर पैथोजेन ( बैक्टीरिया या वायरस) को खत्म करती हैं।

जब मोनोसाइट्स और न्यूट्रोफिल्स का काम खत्म हो जाता है तो उसके बाद नेचुरल किलर सेल्स उन कोशिकाओं को खा कर खत्म कर देती हैं जिन कोशिकों में बैक्टीरिया या वायरस का इंफेक्शन फैल गया होता है, ताकि दूसरे कोशिकाओं में इंफेक्शन ना फैले।

हम और आप अपनी खुली आंखों से बैक्टीरिया और वायरस को तो देख नहीं पाते लेकिन जब हमारे शरीर में कुछ हलचल होती है तो हम समझ जाते हैं कि हमारे शरीर में वायरस या बैक्टीरिया मौजूद है । और इसी प्रकार जब हमारे पेट में कुछ हलचल होती है तो उन नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को खत्म करने के लिए इस्नोफिल्स आए हैं और बड़े पैरासाइट्स जो शरीर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं उन सभी को इस्नोफिल्स खत्म कर देती है।

इनेट इम्युनिटी जब खतरनाक वायरस या बैक्टीरिया को खत्म कर देती है तो इनेट इम्युनिटी के पास सारी जानकारी रहती है जिसके बाद अडेप्टिव इम्युनिटी का काम आसान हो जाता है और शरीर को जल्द से जल्द स्वस्थ करने में अडेप्टिव इम्युनिटी काम करती है। срочный займ на карту онлайн


Posted

in

by

Tags:

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *