सुचि मुखर्जी के उद्यमी बनने की रोचक कहानी

आज इस लेख में हम चर्चा करेंगे व जानेंगे भारत की एक प्रसिद्द व सफल महिला उद्यमी सुची मुख़र्जी जो लिमेरोड की संस्थापक है। अगर स्टार्टअप के सन्दर्भ में इसे देखे तो सुची मुख़र्जी एक प्रेरणा है, प्रोत्साहन है, एक सितारा है। स्वप्न है लोगों का उनकी तरह बनना।

फिलहाल उनके बचपन के बारे में थोड़ा जानते है। सुची मुखर्जी एक मध्यम वर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं। जहां तक ​​उनकी योग्यता का सवाल है, बचपन में, सुची एक अच्छी छात्रा रही हैं, उन्हें हमेशा से ही कुछ नया सीखने की चाह रही है एवं शुरू से ही वह थोड़ी बागी किस्म की भी थी। कही भी कुछ गलत हो रहा हो या बदलाव लाने की बात हो तो वह सबसे आगे रहती थी अपने स्कूल में। उनकी माँ चाहती थी कि वह बाहरवीं के बाद इंजीनियरिंग कर ले, पर उनकी रूचि इकोनॉमिक्स अर्थात अर्थशास्त्र थी। उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज दिल्ली से अर्थशास्त्र में स्नातक किया था और लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स और मैथ्स में बीए व लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से फाइनेंस में मास्टर डिग्री हासिल की थी।

सुची मुखर्जी ने पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने लेहमन ब्रदर्स, ऑनलाइन वीडियो कॉल्स एप्लीकेशल ‘स्काइप’, ई-कॉमर्स कंपनी ‘ईबे’, वर्जिन मीडिया आदि कम्पनियो में काम किया। उन्होंने तकरीबन 9 महीनो तक सेंट स्टीफेंस कॉलेज में ‘डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स’ विषय भी पढ़ाया। वह ‘ईबे’ में तब शामिल हुई थी जब उस कंपनी के यू.के. में शुरूआती दिन थे। उस समय वहां तकरीबन सिर्फ 20 लोग ही काम किया करते थे। वह बताती है की उन्होंने ‘ईबे’ में रहते हुए आत्म जागरुकता व नेतृत्व के काफी गुण सीखे। ‘स्काइप’ में काम करते दौरान उन्होंने सीखा की कैसे ऐसे लोगों के साथ कैसे काम करें जो अपने काम के प्रति बहुत ज्यादा भावुक व कर्तव्यनिष्ठ नहीं हैं।

बहुत लोगो को ऐसा लगता होगा की अपनी खुद की कंपनी खोलना, एक सफल व्यवसायी बनना, यह उनका शुरू से ही उनका लक्ष्य रहा होगा, पर ऐसा है नहीं। ऐसा नहीं था की उन्हें पहले से ही पता था की उन्हें आगे जा के यही करना है, या अचानक एक दिन सुबह उठी और उन्हें इसका विचार आ गया। बात दरअसल कुछ ऐसी है की उनके दूसरे बच्चे के जन्म के बाद से ही सुची मुख़र्जी व उनके पति सोचने लगे कि उन्हें अपने बच्चो की परवरिश कहाँ करनी है, विदेश में या भारत में ?

एक दिन जब शाम को दोनों इस पर चर्चा कर रहे थे तो दोनों ने निर्णय लिया की वह अपने बच्चो की परवरिश भारत में ही करेंगे। सुची मुख़र्जी को शुरू से ही अपने देश, उसकी मिटटी, उसकी सभ्यता व संस्कृति से अलग ही प्यार रहा है। वह कहते है न एक भारतीय के दिल से भारतीयता निकलना संभव नहीं है, कुछ ऐसा ही हाल था उनका भी।

पर अभी भी मुख्य प्रश्न था की वहां जा कर करना क्या होगा?

एक दिन सुची मुख़र्जी ऐसे ही शाम को एक मैग्जीन पढ़ रही थी, तब उन्हें कुछ ज्वेलरी और उनके डिज़ाइन पसंद आये, उन्होंने पता लागया तो पाया की वह सिर्फ भारत की किसी छोटी दूकान में ही उपलब्ध है, उसे ऐसे खरीदा नहीं जा सकता। इससे उन्हें लगा की ऐसी कोई कंज्यूमर टेक्नोलॉजी नहीं है जिससे कि अच्छी एसेसरीज और प्रोडक्ट्स को आसानी से पाया जा सके। तब उन्होंने सोचा की उन्हें भारत की कुछ सबसे पुराने उद्योगों में से एक परिधान (कपड़ा ) उद्योग में ही कुछ करना चाहिए। आखिर ये वही ‘रोटी कपडा और मकान’ में से कपड़ा है जिसकी मांग सदैव ही रहती है ।

उन्होंने जब यह बात अपनी माँ को बताई तो उन्होंने बंगाली में कहा ‘सौर्बोनाश’, इसका यही मतलब था की वह नहीं चाहती थी की उनकी बेटी व्यापार करे। उनका मानना था चूँकि सुची ज़्यादातर विदेश में रही है, तो उन्हें भारत के बाजार के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं।

सुची मुखर्जी का सदैव ध्येय यही रहा की वह लोगो के जीवन में कुछ बदलाव ला सके। उन्होंने भारत के छोटे व मंझले कारोबारियों को एक डिजिटल मंच पर ले जाने के विषय में सोचा। लिमेरोड.कॉम की स्थापना के समय मुख्य लक्ष्य यही रहा था की उन महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित मंच प्रदान करना जो भारत, विदेश और शिपिंग सहित उत्पाद की जानकारी जानकर ऑनलाइन खरीदारी कर सकती है।

महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, वह जानती थी कि महिलाए उत्पाद खरीदने से पहले अन्य विकल्पों की जांच करना पसंद करती है।

जब वह भारत आयी थी तब सिर्फ कुछ गिने चुने लोगो को ही जानती थी जो की परिवारजन और कुछ दोस्त थे। लेकिन वह किसी व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति को नहीं जानती थी। उनके किसी पुराने स्कूल के दोस्त ने उनकी मुलाकात बेजुल सोमाइआ से करवाई एवं उनके किसी सहयोगी ने उनकी मुलाकात अवनीश बजाज से करवाई। लिमेरोड.कॉम के पहले दिन से यह दोनों कंपनी के बोर्ड में सदस्य है। इन्होने सुची मुख़र्जी पर विश्वास किया और कंपनी खड़ी करने में उनकी मदद की। उद्यम के लिए प्रारंभिक पूंजी व निवेश के लिए वह अपने आप को सौभाग्यशाली मानती है। उन्होंने कंपनी की स्थापना 2012 में की थी, और उस वर्ष कंपनी ने मैट्रिक्स पार्टनर्स और लाइट्सपीड वेंचर पार्टनर्स से 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का फंड इकट्ठा किया था ।

इस बीच का एक मज़ेदार किस्सा भी है, अवनीश को इतनी जल्दी विश्वास नहीं था की सुची इस व्यवसाय को पूरा करेंगी, उन्होंने ये बात सुची से भी कई बार कही कि ‘अगर तुमने अपना मन बदल लिया तब क्या होगा’। एक दिन सुची दिल्ली के ट्रैफिक में गाड़ी चला रही थी तब अवनीश का कॉल आया तो सुची ने यह कह कर काट दिया की वह गाडी चला रही है बाद में बात करेगी, जब उन्होंने वापस अवनीश को कॉल किया तो अवनीश उनसे कहते है की तुमने दिल्ली के ट्रैफिक में गाडी चलना सीख लिया, अब मुझे विश्वास हो गया है की तुम अब भारत में रहकर ही व्यवसाय करोगी।

सुची मुख़र्जी ने महिलाओ की परिधान को लेकर समझ जानने के लिए तकरीबन 6 माह तक बाज़ारो में जा कर अध्ययन किया। एक चीज़ जो उन्होंने नोटिस की या जिस बात पर सबसे ज्यादा गौर किया वह यह है की महिलाये बाजार जा कर सबसे पहले क्या नया आया है वह जानने को इच्छुक रहती है की ‘ भैया! नया क्या आया है वो दिखाओ’ इससे उन्हें समझ आया की भारत में आम लोगो के जीवन में परिधान को लेकर ब्रांड ज्यादा मायने नहीं रखते जितनी नई चीज़े रखती है और इसलिए लिमेरोड.कॉम का अनुमान इस ‘नया’ वाली अवधारणा पर है। व्यवसाय के विषय में उनकी समझ अविश्वसनीय हैं।

शुरुआत में, कंपनी ने केवल महिलाओं के सामानों की बिक्री शुरू की थी । हालाँकि, सुची मुखर्जी ने वेबसाइट के होम एंड डेकोर, किचन सहित पुरुषों के किड्स वियर को जोड़कर कंपनी का विस्तार किया है । उन्होंने मांग और आपूर्ति के बीच सही संतुलन की पहचान कर अपने व्यवसाय को बुलंदिया तक पहुंचाया है। वह बताती है की हमेशा लिमेरोड में उनका जज़्बा यही रहता है की वो आज कल से अच्छा क्या और कर सकती है।

आज सुची मुखर्जी न केवल कंपनी की संस्थापक हैं, बल्कि वह भारत में एक ई-कॉमर्स चेहरा भी बन गई हैं। उन्होंने कई पुरस्कार व सम्मान भी जीते जैसे की –

  • 2018 में कॉन्फ्रेंस द स्टार्ट-अप इंडिया – स्टैंड अप इंडिया के समय उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के साथ मंच साझा किया।
  • 2015 में उन्हें बिज़नेस टुडे द्वारा ‘कूलेस्ट स्टार्ट उप ऑफ़ द ईयर’ से नवाज़ा गया।
  • 2015 में उन्होंने इंफोकॉम की तरफ से ‘इंफोकॉम वीमेन ऑफ़ द ईयर’ जीता।
  • 2016 में, एन.डी.टी.वी ने उन्हें ‘यूनिकॉर्न स्टार्ट-अप पुरस्कार’ से सम्मानित किया।
  • 2017 में, वह द इकोनॉमिक टाइम द्वारा ‘ई.टी. स्टार्ट-अप पुरस्कार’ के लिए नामांकित हुई।
  • 2016 में लिमेरोड भारत में हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को ऑनलाइन बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के एम.पी. लगु उद्योग निगम के साथ सांझेदारी में काम किया।

किसी साक्षात्कार में उन्होंने एक बात कही थी जो याद रखने योग्य है, उन्होंने बतलाया था की जीवन एक नाटक का मंच या कह सकते है एक नृत्य का मंच है जहां आप सदैव वही रहते है पर आपके साथ आपके पार्टनर्स बदलते रहते है, चाहे वो काम में आपके सहयोगी हो, बच्चे हो, मित्र हो, परिवार जान हो या कोई और, बस आप जिस वक़्त जिसके साथ हो पूरी निष्ठा व ध्यान से वही रहना चाहिए। यह उनकी तरफ से एक सफलता का मंत्र है। быстрые займы онлайн


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