मुकेश अम्बानी ने सड़क के बीचो-बीच पूछा "मुझसे शादी करोगी"? नीता अम्बानी ने रख दी शर्त

अंबानी परिवार का अंदाज हमेशा से ही निराला रहा है। दुनिया भर के पहले 10 उद्योग पतियों में आने के बाद मुकेश अंबानी भी पीछे नहीं रहे हैं। इस परिवार ने कोविड-19 के लिए भी बहुत दान दिया है। कुछ दिन पहले वह अपने बेटे की शादी के विषय में भी काफी चर्चा में थे। दुनिया को यह ज़रूर लगता होगा कि इतना बड़ा व्यापार संभालने के बाद, अम्बानी परिवार को अपने घर के सदस्यों के लिए समय नहीं मिलता होगा। लेकिन ऐसा नहीं है और वह एक दूसरे के साथ बहुत प्यार से एवं मिल जुल कर रहते हैं। यहाँ तक कि उनके परिवार की जो शादियां होती हैं,  वह भी प्रेम और खुशिओ के साथ होती है। इसी से सम्बंधित आज का हमारा विषय भी हैं। आज हम आपको बताने आए हैं कि मुकेश अंबानी और नीता अंबानी की शादी भी कितने अनोखे अंदाज़ मे हुई थी।

उनके प्यार की शुरुआत

धीरूभाई को तो मानो अपनी बहू के रूप में एक हीरा ही मिल गया था। वह एक नजर में ही उनसे प्रभावित हो गए थे। यह बात तब की है जब घर का एक कार्यक्रम चल रहा था। उसमे अपनी कला को उम्दा तरीके से प्रदर्शित करते हुए नीता ने भरतनाट्यम किया था। वह बचपन से ही यह कला सीखते हुए आ रही थी।

उनके इस अंदाज को देखकर धीरुभाई उनसे बहुत ज्यादा प्रसन्न हुए थे। उस समय तो उन्होंने कुछ नहीं कहा। लेकिन कहीं से उन्होंने उनके परिवार का नंबर पता लगा लिया। फिर कार्यक्रम समाप्त हुआ और सब अपने घर चले गये। घर जाने के बाद धीरूभाई ने नीता को फोन लगाया। फोन आने पर नीता को यह यकीन ही नहीं हो रहा था कि धीरूभाई ने उन्हें खुद फोन किया हैं। इसीलिए एक दो बार तो वह उसको मजाक समझ रही थी। बार-बार कॉल आने पर वह घबरा गई और उन्होंने अपने पिता को फोन दे दिया। जब पिता ने फोन उठाया तब उनको धीरुभाई की आवाज पहचान में आ गयी। वो मुस्कुराए और उन्होंने नीता को फ़ोन देदिया।

बात-चीत का सिलसिला

कुछ देर तक वह ऐसे ही बात करते रहे। बात-चीत के दौरान उन्होंने उनके पढ़ाई, गुण इत्यादि के बारे में उनसे पूछा। उसके बाद कॉल समाप्त करते हुए उन्होंने उनसे कहा कि तुम मेरे दफ़्तर आ जाना। यह बात सुनकर वह बहुत घबरा गई थी। तब उनके परिवार ने उनको समझाया कि उनको वहाँ जाना चाहिए। अगले दिन वो वहाँ गई और उनकी मुलाकात धीरुभाई से हुई। थोड़ी देर वो वहाँ बैठी फिर उनकी बातचीत शुरू हुई। बातचीत के दौरान धीरुभाई ने साफ-साफ उनसे पूछ लिया कि क्या तुम मेरे बेटे से मिलना चाहोगी। उन्होंने इस बात पर मुस्कुराते हुए हाँ कह दी।

पहली मुलाकात

पिता की रज़ामंदी के बाद उन दोनों की एक दूसरे से मुलाकात हुई। अब धीरे-धीरे मानो उन दोनों का रिश्ता और मजबूत होता जा रहा था। वक़्त बीत ता रहा और वह दोनों एक दूसरे से ऐसे ही मिलते रहे। नीता को मुकेश का सरल स्वभाव बहुत ही ज्यादा पसंद था। परंतु, उसके बावजूद भी वह असमंजस में फंसी हुई थी। क्योंकि एक तरफ उनको पढ़ाई करना थी और दूसरी तरफ कुछ दिन बाद उनके लिए शादी का रिश्ता आने वाला था। इधर नीता परेशान थी वहीं दूसरी तरफ मुकेश इस रिश्ते के लिए मन ही मन रजामंदी बना चुके थे। उन्होंने ठान लिया था की वह शादी सिर्फ और सिर्फ नीता से ही करेंगे।

ट्रैफिक रोक कर पूछा” मुझसे शादी करोगी”?

मुकेश अम्बानी से अब और इंतजार नहीं हो रहा था। वह उनके प्यार मे मानों पागल ही हो चुके थे। इसी वजह से उन्होंने एक दिन बीच रास्ते में गाड़ी रोककर उनके सामने शादी करने का प्रस्ताव रख दिया। नीता यह प्रश्न सुनकर एकदम से घबरा गई। मुकेश ठान चुके थे कि या तो वह आज हाँ सुनकर जाएंगे या तो फिर ना सुनकर। गाड़ी सड़क के बीचो-बीच खड़ी हुई थी और पीछे से गाड़ियों की आवाजे भी आ रही थी। तभी उन्होंने फटाफट निर्णय लेकर उनको शादी के लिये हाँ कह दिया। परंतु, हाँ बोलने पर उन्होंने एक शर्त रखी थी। मुकेश ने उस शर्त को मंज़ूर करके उनसे विवाह रचा लिया था।

क्या थी वह शर्त?

शर्त यह थी की शादी के बाद भी वह नौकरी करना चाहती थी। मुकेश ने शर्त को कबूल लिया था और उसके बाद वह धीरूभाई इंटरनेशनल स्कूल चला रही थी। वह स्कूल इसलिए चलाना चाहती थी क्योंकि उनको पढ़ाना बहुत पसंद था और वह देश को तरक्की करते हुए भी देखना चाहती थी। हालांकि, बाद में उन्होंने नौकरी को  और रिलायंस ग्रुप में अपनी भागीदारी देना शुरू कर दिया था।

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