Ola Cab के फाउंडर भाविश अग्रवाल की कहानी

कहते हैं जब किसी काम को करने की जिद सवार हो जाती है, तो उस काम को  पूरा करने के बाद ही चैन आता है। नए मुकाम हासिल करने के लिए संघर्ष, लगन और मेहनत के अलावा जिद्दी का भी होना ज़रूरी  है। कुछ ऐसी ही जिद भरी कहानी है ओला कैब के को – फाउंडर भाविश अग्रवाल की है। कॉलेज में पढ़ते समय उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी थी लेकिन इस शुरुआत को अंजाम मिला 2010 के बाद जब उन्होंने विश्व स्तरीय कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को अलविदा कहा और खुद नई कंपनी की शुरुआत की। खैर आपको उनकी कहानी हम शुरुआत से बताते हैं।

भाविश अग्रवाल का छोटा सा परिचय

  • पूरा नाम –  भाविश  अग्रवाल (Bhavish Aggarwal)
  • जन्म  –  28 अगस्त 1985 ( August 28, 1985)
  • जन्म स्थान –  लुधियाना,पंजाब (Ludhiana, Punjab )
  • कम्पनी –  Ola (ओला)
  • पोस्ट –  CEO (Chief Executive Officer)
  • कम्पनी की शुरूआत  – 3 दिसम्बर 2010  (December 03, 2010)

हर एक इंसान का सपना होता है कि वह पढ़ने लिखने के बाद एक अच्छी कंपनी में जॉब करें। ‌ खासकर अगर किसी ने आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम जैसे उच्च संस्थान से शिक्षा प्राप्त की है, तो वह जरूर चाहता है कि वह दुनिया के टॉप मोस्ट कंपनी जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ऐमाज़ॉन, टाटा, रिलायंस, एप्पल, सैमसंग आदि बड़ी कंपनियों में अपना कैरियर बनाएं। और एक बार नौकरी लगने के बाद हर इंसान अपनी लाइफ आराम से जीना चाहता है । सुबह 9:00 से 5:00 नौकरी और उसके बाद परिवार के साथ समय बिताना। लेकिन ओला कैब के को – फाउंडर भाविश अग्रवाल को यह नहीं पसंद था। उन्हें कुछ बड़ा करना था। अपनी एक अलग पहचान स्थापित करनी थी। और आज उन्होंने  अपनी पहचान भी स्थापित कर ली है। लेकिन इस पहचान को बनाने के लिए उन्होंने संघर्ष किया है।

आईआईटी मुंबई से बीटेक और माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी

भाविश अग्रवाल ने आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया है। कॉलेज से ही उनका कैंपस सिलेक्शन हो गया और वह इंडिया माइक्रोसॉफ्ट के लिए काम करने लगे, बेंगलुरु में।

भावेश ने 2008 से 2010 तक माइक्रोसॉफ्ट में काम किया और उसके बाद उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट मानी जानी-मानी कंपनी को अलविदा कह दिया। अब अगर किसी का लड़का  बड़ी कंपनी को छोड़ देता है तो जाहिर सी बात है उसके माता पिता को दुख होगा ही,  कि बताओ इतनी बड़ी कंपनी छोड़ दिया है अब क्या करेगा?

जब भाविश अग्रवाल ने अपने जानने वालों से इस बिजनेस ( ओला कैब) के बारे में बताया तो सभी ने भाविश का मज़ाक उड़ाया और कहा कि यह क्या मूर्खता कर रहे हो बड़ी कंपनी छोड़कर  स्टार्ट अप करना चाहते हो, यह क्या है? स्टार्टअप में कुछ रखा नहीं है। ऐसा भाविश के करीबियों ने कहा। लेकिन भाविश ने हार नहीं मानी क्योंकि उनको कुछ बड़ा करना था।

ऐसे आया था आईडिया

भाविश खुद ही बताते हैं कि  एक बार वह एक टैक्सी से कहीं जा रहे थे। और टैक्सी ड्राइवर से पहले ही बात हो चुकी थी कि इतने पैसे वह लेगा वहां तक जाने के लिए जहां तक उन्हें जाना है।‌ रात का समय था। सूनसान इलाका ड्राइवर ने देखा टैक्सी रोक दी। और ड्राइवर भाविश से कहने लगा कि अब वह आगे नहीं जा सकता। भाविश ने पूछा क्यों भाई क्यों नहीं जाओगे? उस टैक्सी ड्राइवर ने कहा कि रास्ता खराब है मुझे और पैसे चाहिए मैं इतने पैसों में आगे नहीं जा पाऊंगा। भाविश अग्रवाल ने उस टैक्सी ड्राइवर से कहा अरे भाई हमारी तो बात हो चुकी है ना, हम आपको इतना पैसा देंगे, अब और पैसों की बात कहां से आ गई। ड्राइवर बोला अगर आपको जाना है तो आपको और पैसा देने ही होंगे नहीं तो मैं नहीं जाऊंगा। टैक्सी वाला नहीं तैयार हुआ और ना ही भाविश  ज्यादा पैसा देने को तैयार हुए। भाविश  ने कहा आप जाइए हम चले जाएंगे । अब वह टैक्सी वाला चला गया। अब रात का समय था भाविश को दूसरी टैक्सी भी मिली नहीं तो इसीलिए उन्हें वहां से पैदल ही जाना पड़ा।

इस वाक्या ने भाविश को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्यों ना कुछ ऐसा सिस्टम बनाया जाए कि लोगों को कम पैसे में ट्रेवल कराया जाए, ज्यादा किसी को परेशानी या दिक्कतों का सामना ना करना पड़े।‌

https://youtu.be/Sk91U36QjNQ

इसके लिए उन्होंने अपने पार्टनर अंकित भाटी के साथ मिलकर ओला कैब की शुरुआत की। शुरुआत में भाविश‌ को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ‌ यहां तक उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड की कार को भी ओला सर्विस में इस्तेमाल किया था जो कि अब उनकी बीवी है । उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड से ही शादी कर ली थी। जब इस कंपनी को 2012 में टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट की तरफ से $5000000 का इन्वेस्टमेंट मिला तो यह कंपनी अपनी सफलता की ओर चल पड़ी।

2011 में शुरू हुई यह कंपनी आज ऊंचाइयों पर काबिज है और भारत ही नहीं भारत से बाहर भी अब इसका दायरा बढ़ने लगा है। वह (भाविश)  अपने दोस्त अंकित भाटी से बस यही कहते थे कि तुम अच्छे से कोडिंग करो और आप सिस्टम इतना आसान बनाओ की कस्टमर और ड्राइवर दोनों को सुविधा हो। ओला कैब का ऐप इतना लाइटवेट (हल्का) है।  ओला ऐप 2G, 3G, 4G किसी भी नेटवर्क पर आसानी से खुल जाता है। नेटवर्क की ज्यादा कोई प्रॉब्लम नहीं होती।

शुरुआती में ओला ने अपने कस्टमर और अपने ड्राइवरों पर बहुत पैसे लूटाए ताकि वह अपने कस्टमर और ड्राइवर जुटा सके। 2015-16 में कस्टमर को लुभाने के लिए कंपनी ने आकर्षक ऑफर दिए थे जिसमें उनको बहुत घाटा भी उठाना पड़ा।  लेकिन इसके पीछे भाविश अग्रवाल का प्लान कुछ और था उनका प्लान तो ग्राहकों को इकट्ठा करना था। 2016- 17 में कंपनी का घाटा करीब 4897.8 करोड़ रुपए था।

आज यह कंपनी भारत के करीब 250 शहरों में अपनी सर्विस दे रही है। भारत ही नहीं भाविश अग्रवाल और उनके पार्टनर अंकित भाटी ने ओला को ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूनाइटेड किंगडम में भी लैंड करा दिया है।  आज यह  कंपनी 1 दिन में 1 बिलियन से ज्यादा राइड प्रतिदिन करती है । जबकी इस कंपनी में 1.5 मिलियन से ज्यादा ड्राइवर काम करते हैं और करीब 7000 टेक्निकल एंप्लॉय इस कंपनी में काम करते हैं।  2018 में ओला ने करीब 310  मिलियन डॉलर का कारोबार किया था ।

ओला को इस मुकाम तक ले जाने के लिए  फाउंडर्स भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी ने जी तोड़ मेहनत की है। अब उनका प्लान इंडिया ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ही नहीं बाकी और भी देशों में ओला कैब को ले जाने का है।

दिलचस्प बात अभी तक नहीं खरीदी है खुद के लिए कार

ओला के CEO और को – फाऊंडर और उनकी पत्नी राजलक्ष्मी अग्रवाल ने यह फैसला लिया है कि वह कभी अपने लिए कार नहीं खरीदेंगे और हमेशा ओला कैब से सफर करेंगे। एक बेहद अलग सोच है। यह नए हिंदुस्तान की नई सोच है। सच ही कहते हैं कि एक अलग सोच आदमी को कामयाब बनाती है..

अगर आपको ओला के को फाउंडर और सीईओ भाविश अग्रवाल कि यह  कहानी दिलचस्प लगी हो तो जरूर शेयर करें, कमेंट करें और हमें बताएं कि आपको किसकी कहानी सुननी है।

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