एक तरफ 10 लाख रूपए देकर किया 4 लोगों ने प्लेन मे सफर, वहीं मजदूर मर रहे हैं पैदल चलकर

पैसा एक ऐसी चीज है जो हर चीज को खरीद सकता है। इसी बात का उल्लेख करते हुए हम आपको अभी कुछ ही दिन पहले घटित हुई एक घटना के बारे में बताना चाहते हैं।

एक तरफ हम यह देख रहे हैं कि सौ से ज्यादा किलोमीटर पैदल चलकर बिचारे मजदूर अपने घर जा रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ अमीर लोग अपने पैसों से ऐशों-आराम फरमाते हुए प्लेनो मे सफर कर रहे हैं। जहां एक तरफ ट्रैन की सुविधाएं जून तक के लिए रद्द कर दी गयी थी। वही दूसरी तरफ एक अमीर परिवार को एक चार्टर प्लेन में सफर करने की अनुमति आराम से दे दी गई।

प्लेन में कौन-कौन था?

हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि वह प्लेन 180 लोगों को एक बार में पहुंचा सकने की क्षमता रखता था। लेकिन उसमें सिर्फ चार लोगों ने सफर किया और वह एक परिवार था। इतने बड़े विमान को 4 लोगो के लिए इस्तेमाल करना भी उनके लिए काफ़ी भारी पड़ गया था क्योकि इसमें सफर करने के लिए उन लोगों को कम से कम 10 लाख तक किराया भरना पड़ गया था।

हालांकि यह सफर 4 बार मे खत्म हुआ था। पहले वह विमान दिल्ली से भोपाल गया और फिर वापस भोपाल से दिल्ली आ गया। लेकिन अगर इसी कार्य को लोकहित में किया जाता, तो शायद 10 लाख रुपए उन गरीब लोगों के लिए खुदा की गनीमत होती।

अमीरों के लिए चार्टर विमान

जो अमीर लोग हैं उनको भीड़ में सफर करने से बहुत डर लगता है। आपको बता दें कि वह इस बात से डरते हैं कि कहीं उनको करोना ना हो जाए। इसी वजह से वह अपने पैसे को इस्तेमाल कर के एक जगह से दूसरी जगह आराम से चले जाते है।

इस बढ़ते लॉक डाउन के समय में एरोप्लेन वाली कंपनियों को भी फायदा हो रहा है। इसका कारण चार्टर विमान हैं क्योकि उसकी मांग बढ़ चुकी है। इसको मद्दे नज़र रखते हुए जो लोग इसका आराम से वहन कर सकते हैं। उनके लिए इस सुविधा का जल्द से जल्द और इंतजाम करवाया जा रहा है। 

चार्टर विमान: आम विमानों के मुकाबले बहुत खास

यह इस वजह से खास होते हैं क्योकि यह खास लोगो कि सुविधा के हिसाब से बनाये जाते हैं। इसी वजह से इनके दाम भी दुगुने होते है। जी हाँ, यह विमान प्रति घंटा के हिसाब से ₹ 5 लाख तक का चार्ज करते हैं। इसका इस्तेमाल करके कई और परिवार भी अपने घर, विभिन्न जगहों से वापस आए हैं।

अंतर सिर्फ इतना है कि अमीर लोगों के पास पैसे होते हैं और वह सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। और जिन लोगों के पास पैसे नहीं होते वो अपने बच्चे की लाश कंधे पर लेकर नंगे पैर 100 किलोमीटर चुपचाप चलते जाते हैं। यही हमारे देश की सच्चाई है और कही ना कहीं इसी लापरवाही की ही वजह से करोना के केस दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं।

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