40 साल से कमरे में बंद इस शख्स ने कैसे दिखाया बच्चों को सुनहरे भविष्य का रास्ता

मनुष्य की जिंदगी चुनौतियों से भरी हुई है। जिस प्रकार दिन के बाद रात्रि का आना स्वाभाविक है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में सुख के बाद दुख का आना भी अनिवार्य है। समस्याएं, दुख, विपरीत स्थिति हमारे संयम था और आध्यात्मिकता का इम्तिहान होता है और जो मनुष्य इन सभी विपरीत परिस्थितियों का धैर्य से सामना करता है और सकारात्मक सोच रखता है वही आगे चलकर सफल होता है।

मनुष्य के जीवन में कभी-कभी ऐसे भी परिस्थितियाँ आती है, जिनका साहस पूर्वक सामना करना मुश्किल हो जाता है, परंतु ईश्वर पर विश्वास और अपने मन की शक्ति के साथ हम किसी भी परिस्थिति का सामना करके उससे ऊपर उठ सकते हैं। ईश्वर पर विश्वास करने से हमारा आंतरिक मनोबल बढ़ता है जिससे हमें कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

"Imagine being in quarantine for 40 years– that's the story of my life. When I was 9, I woke up one night with a fever….

Posted by Humans of Bombay on Thursday, June 18, 2020

Image Source: Humans of Bombay

आज हम अपने दर्शकों के लिए एक ऐसे व्यक्ति की जीवनी लेकर आए हैं, जिसने अपने दोनों पैर होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और समाज में एक मिसाल बन कर सामने आया। इस साहसी व्यक्ति का नाम है राजीव पोद्दार

जब राजीव 9 साल के थे, तब उनके जिंदगी में एक ऐसी ही घटना हुई जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल कर रख दी। सिर्फ 9 साल की उम्र में पैरालाइसिस के कारण उन्हें अपने दोनों पैर गंवाने पड़े। दोनों पैर खोने के बाद वह सिर्फ व्हीलचेयर के द्वारा चल पाते है। पैरालाइसिस के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें स्कूल से लेकर आने जाने में सक्षम नहीं थे। परन्तु, स्कूल से दूर होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई करना जारी रखी।

वह अपने दोस्तों से किताब मांग कर पढ़ा करते थे। राजीव के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी जिसकी वजह से उन्हें और उनके पूरे परिवार को बहुत संघर्ष करना पड़ा। परंतु, राजीव ने इन सभी विपरीत परिस्थितियों का सामना किया और इन पर विजय प्राप्त की।

बहुत सारी किताबें पढ़ने के कारण राजीव की बौद्धिक क्षमता बहुत अच्छी थी। उनके पड़ोसी एवं जानने वाले लोग अपने बच्चों को उनके पास ट्यूशन के लिए भेजा करते थे। राजीव को मैथ्स पढ़ाना बहुत पसंद था और वह मैैथ्स सब्जेक्ट को इस मजाकिया और मजेदार अंदाज में पढ़ाते थे कि उनका तरीका बच्चों को बहुत पसंद आने लगा। अपने इस अनोखे अंदाज की वजह से राजीव कोलकाता के जाने-माने टीचर बन गए और बहुत से बच्चे उनके पास ट्यूशन के लिए आने लगे, परंतु आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि राजीव ने कभी अपने स्टूडेंट से पैसे नहीं लिए। वह उन्हें फ्री में पढ़ाते हैं। राजीव ने अपने इस नेक काम को जारी रखा और ‘नॉलेज कैप्सूल’ की स्थापना की।

आजकल राजीव यूट्यूब पर अलग-अलग विषयों पर वीडियो बनाकर शेयर करते हैं और लोगों को जागरूक करते हैं। राजीव पोद्दार उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है, जिन्होंने कभी विपरीत परिस्थितियों से हार नहीं मानी और उनका डटकर सामना किया है।

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