जानिए कैसे एक शिक्षित स्त्री ने सिखाया "फकीरी" का असली मतलब

समाज में फैली जागरूकता उसकी उन्नति एवं प्रगति का प्रतीक है। समाज में जागरूकता विभिन्न तरीकों से फैलाई जा सकती है जैसे स्त्रियों को शिक्षा में प्रोत्साहन, समाज से भेदभाव खत्म करना, सभी नागरिकों को सम्मान देना, आदि।

प्राचीन काल में हमारे समाज में स्त्री शिक्षा को अधिक महत्व नहीं दिया, इसलिए आज भी भारत के कुछ पिछड़े इलाकों में पुरुषों के मुकाबले शिक्षित स्त्रियों की संख्या बेहद कम है। स्त्रियां किसी भी समाज की रीड की हड्डी मानी जाती है इसलिए उनका शिक्षित होना और समाज में प्रगति करना बेहद जरूरी है क्योंकि एक शिक्षित स्त्री पूरे परिवार को शिक्षा के तरफ जागरूक कर सकती है। सामाजिक ही नहीं, परंतु शिक्षा से व्यक्तिगत जागरूकता भी आती है।

जहां एक तरफ भारतीय समाज में स्त्री शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता वहीं दूसरी तरफ समाज का एक ऐसा तबका भी सामने आया जिन्होंने स्त्री शिक्षा को महत्व देना शुरू किया। ज्योतिबा फुले, महात्मा गांधी, सावित्रीबाई फुले, एनी बेसेंट उसी समाज के हिस्सा है।

आज हम अपने दर्शकों को, एक पौराणिक कथा के माध्यम से इस बात से अवगत कराना चाहेंगे कि शिक्षित स्त्री किसी से कम नहीं होती और स्त्री शिक्षा क्यों जरूरी है।

पुराने समय में शाह शूजा नामक एक व्यक्ति था जिसकी पुत्री अत्यंत ज्ञानी, धर्म का पालन करने वाली और वैराग्य भावना से परिपूर्ण थी। शाह शूजा ने अपनी बेटी के इन गुणों को देखते हुए उसका विवाह एक ज्ञानी फकीर से करा दिया। शाह शूजा स्त्री शिक्षा में विश्वास करता था और उसे लगा कि अगर उसकी बेटी एक ज्ञानी फकीर के साथ रहेगी तो वह अपने जीवन को अपनी इच्छा अनुसार व्यतीत कर पाएगी।

शादी के बाद शाह शूजा की पुत्री अपने पति के साथ खुशी-खुशी उसकी कुटिया में रहने लगी। एक दिन सफाई करते वक्त उसको छत पर दो रोटियां लटकी हुई दिखी। उसने आश्चर्यचकित होकर अपने पति से पूछा कि वह दो रोटियां ऊपर क्यों लटकी है!? फकीर ने बताया कि वह दो रोटियां कल खाने के लिए रखी हुई है। यह सुनकर वह हंसने लगी और उसको हंसते हुए देखकर फकीर सोच में पड़ गया।

शाह शूजा की बेटी ने बड़ी विनम्रता से कहा कि वह अपने पति को सच्चा फकीर मान रही थी, परंतु जो व्यक्ति आज में रहते हुए कल के बारे में सोच रहा है, वह सच्चा फकीर कैसे हो सकता है। कल की चिंता करने वाला सच्चा फकीर नहीं हो सकता। अपनी पत्नी की इन बातों को सुनकर फकीर की आँखें खुल गई और उसने अपनी पत्नी को अपना गुरु मान लिया।

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