विटामिन डी बहुत जरूरी है अच्छी सेहत के लिए

धरती पर मानव का विकास और अस्तित्व के लिए सूर्य की रोशनी मूलभूत आवश्यकता है। आज के दौर में मनुष्य मशीनी जीवन का आदी हो चुका है वातानुकूलित बहुमंजिला घरों,  दफ्तर और गाड़ियों में उसके दिन के अधिकांश घंटे गुजर जाते हैं फलतः सूर्य के प्रकाश में हमारे शरीर का सीधे संपर्क कम हो गया है। इस समय कोरोना वायरस के चलते लाकडाउन में हम सब घरों में बंद हैं, बाहर निकलना कम हो गया है। जिस कारण से हमारे शरीर के लिए आवश्यक विटामिन डी की आपूर्ति नही हो पा रही है 

सूर्य का प्रकाश जैसे पेड़ पौधों में भोजन बनाने के लिए आवश्यक है वैसे ही यह मानव में विटामिन डी की आपूर्ति के लिए आवश्यक है। यह विटामिन हमारे शरीर में न केवल कैल्शियम और फास्फोरस को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है अपितु हड्डियों के मजबूत ढांचे और सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।

विटामिन डी की कमी से खतरे

विटामिन डी की कमी और इससे होने वाले रोग आज आम है। दुनिया में एक बड़ी आबादी आज इसकी कमी से होने वाले रोगों से ग्रसित है। विटामिन डी की कमी से बच्चों में रिकेट्स अथवा सूखा रोग हो जाता है और वयस्कों में ऑस्टीओपरोसिस होने का खतरा ज्यादा होता है। विटामिन डी ऐसा विटामिन है जो शरीर में कैल्सियम को नियंत्रित करता है और कैल्शियम शरीर में हड्डियो की मजबूती के लिए जरुरी है। 60 वर्ष से अधिक आयु के मनुष्यों में इसकी वजह से हड्डियों का कमज़ोर होना, चलने फिरने में मुश्किलें आम समस्या है। 

महिलाओं और बच्चों के लिए बेहद जरुरी विटामिन डी

आमतौर पर महिलाए घरों में ही रहती है और बाहर निकलने पर भी शरीर को पूरा ढंके रहती हैं, जिससे उनके शरीर आवश्यक विटामिन डी का अवशोषण नहीं हो पाता है। गर्भावस्था एवं मातृत्व के दौरान महिलाओं को अतिरिक्त विटामिन डी की आवश्यकता होती है। यह देखा गया है कि महिलाएं बहुधा सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करती हैं जोकि विटामिन डी के आपूर्ति में बाधक बनता है। बच्चों में विटामीन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इससे बच्चों के पैर तिरछे होने की संभावना हो जाती है। इसकी कमी से जल्दी- जल्दी फ्रैक्चर होना और फ्रैक्चर होने के बाद हड्डियों के देरी से जुड़ने की समस्या आती है।

हमें कैसे मिले पर्याप्त विटामिन डी

सूर्य का प्रकाश विटामिन डी प्राप्त करने का सबसे सस्ता सुलभ और भरोसेमंद स्रोत है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हमारे शरीर के लिए आवश्यक विटामिन डी का 80% हिस्सा हमें सूर्य के प्रकाश से मिल जाता है यदि हम हफ़्ते में तीन से चार दिन मात्र 20-30 मिनट धूप का आनंद लेते हैं। साँवले और गहरे रंग वाले लोगों के लिए यह समय थोड़ा बढ़ जाता है। 

विटामिन डी की कमी कैसे हो पूरी

शरीर में विटामिन डी की आपूर्ति के लिए खाद्य पदार्थों का सहारा लिया जाता है, आइए जानते हैं कि किन प्राकृतिक चीजों के इस्तेमाल से हम विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं। 

विटामिन डी मशरूम एंड कार्डलीवर आइल में प्रचुर मात्रा में होता है। मछली का मांस विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। जो लोग मांसाहारी होते हैं उन्हें अंडे और मांस मछली से पर्याप्त विटामिन डी और अन्य प्रोटीन्स भी मिल जाते हैं।

शाकाहारी लोगों के लिए मशरूम, दूध और दुग्ध उत्पाद विटामिन डी की आपूर्ति करते हैं मशरूम में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होता है। वाइट बटन, वाइल्ड एडिबल और चैन्ट्रल जैसी किस्म के मशरूम में विटामिन डी पाया जाता है। एक गिलास दूध प्रति दिन पीने वालों को कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा मिल जाती है। इसलिए हमें रोज एक गिलास दूध का सेवन अवश्य करना चाहिए। शाकाहारी लोग दूध से बनी चीजें भी खा सकते हैं। जैसे- दही और चीज़। दही पौष्टिकता तो देता ही है, कैल्शियम को सोखने में भी मदद करता है 

जिस व्यक्ति के शरीर में विटामिन डी की कमी है, उसे कैल्शियम की दवा का सहारा नहीं लेना चाहिए, सिर्फ प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का ही सेवन करना चाहिए।

फोर्टिफाइड फूड्स का प्रयोग

फूड प्रोसेसिंग के वक्त जिसके शरीर से विटामिन्स और मिनरल खत्म हो जाते हैं, उसकी कमी फार्टफाइड फूड्स पूरा करते हैं। फोर्टिफाइड फूड्स अतिरिक्त विटामिन और मिनरल से समृद्ध खाद्य पदार्थ होते हैं। यह खाद्य  पदार्थों की पौष्टिकता को भी बढ़ा देते हैं। बाजार में विटामिन डी से भरपूर  बहुत से फार्टफाइड फूड्स उपलब्ध हैं जैसे-ब्रेड,सेरल,दूध,पनीर,चीज़,सोया मिल्क और संतरे का जूस।

विटामिन डी पाने के लिए घरेलू उपचार

  1. प्रतिदिन में बगैर सनस्क्रीन लोशन लगाए 15 मिनट धूप का सेवन करें।
  2. ठंड के महीनों में विटामिन डी का पर्याप्त विकास होता है। इन दिनों में बाहर टहलना, दौड़ना, नाचना, वजन उठाना और तैराकी तथा व्यायाम करने से विटामिन डी की कमी नही होगी।
  3. यदि आपके घर में सूर्य का प्रकाश पर्याप्त मात्रा में नही आता है तो विटामिन D की पूर्ति करने वाले खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें। जैसे मछली-मांस और दूध और दही।
  4. 40 वर्ष से अधिक उम्र वाली महिलाएं ओस्टियोपोरोसिस की शिकार हो सकती हैं, इसलिए इन्हें विटामिन डी से समृद्ध आहार लेना चाहिए।

इन चीजों से रहे दूर

  1. भोजन में तली एवं वसायुक्त चीजें कि प्रयोग न करें क्योंकि यह लीवर और किडनी पर बुरा प्रभाव डालतीहैं। यह दोनों अंग विटामिन डी के संश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  2. नमक, शक्कर और अन्य शक्करयुक्त उत्पादों से दूर रहें।
  3. कैफीन का प्रयोग सीमित मात्रा में ही करें। क्योंकि कैफीन विटामिन डी के अवशोषण में अवरोध उत्पन्न करता है।
  4. सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल न करें।

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