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एनिमल फ़ार्म: 75 साल पहले लिखी किताब अब भी क्यों प्रासंगिक लगती है?

पुस्तक :एनिमल फार्म 

लेखक:जॉर्ज ऑरवेल

अनुवाद:सूरज प्रकाश 

प्रकाशक: मैड्रक पब्लिकेशन

एनिमल फार्म :पुस्तक समीक्षा

 आज के समय में राजनीति का थोड़ा बहुत ज्ञान होना बहुत जरूरी है इसके लिए हमें नेताओं के भाषण सुनना, उनकी नीतियां सुनना बेहद जरूरी है. लेकिन कभी-कभी सत्ता में बैठे लोगों से हम तंग आ जाते हैं क्योंकि लोग रोज वही भ्रष्टाचार, झूठे वादे,अन्याय से तंग आ चुके हैं. कभी-कभी लोग इतने गुस्से में आ जाते हैं कि उन्हे अपशब्द ,गालियां देना शुरु कर देते हैं. यह किसी एक सत्ताधारी पार्टी की बात नहीं है जो कोई भी सत्ता में आता है उनको अपनी शक्तियों पर घमंड होने लगता है और वह सत्ताधारी लोग जानवरों की तरह व्यवहार करने लगते हैं. लेखक जॉर्ज ऑरवेल पुस्तक में लोगों के इन्हीं भावों और सत्ताधारियों के दुर्व्यवहार को वर्णित करते हैं. लेखक का जन्म मोतिहारी के बिहार में हुआ उन्होंने उपन्यास सन् 1944 में लिखना शुरू किया जो कि सन् 1945 में प्रकाशित हुआ.

जॉर्ज ऑरवेल की पुस्तक एनिमल फार्म का अनुवाद सूरज प्रकाश द्वारा किया गया है. जॉर्ज ऑरवेल की पुस्तक के किरदार जीव-जंतु है. लेखक जीव-जंतु के माध्यम से पाठकों को कहानी से अवगत कराते हैं.इस पुस्तक का अनुवाद दुनिया भर में कई भाषाओं में हुआ है. कहानी वास्तविकता पर लिखी गई है. सत्ताधारी लोग किस तरह आम जनता को परेशान करते हैं, अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं, कह सकते हैं कि लेखक का उपन्यास सत्ताधारी लोगों की सच्चाई अभिव्यक्त करता है. उपन्यास में लेखक ने साम्यवादी क्रांति के समय हुए भ्रष्टाचार को भी दिखाता है यह बताता है कि क्रांति शुरू तो सबके भले के लिए हुई थी लेकिन आगे बढ़ते-बढ़ते उसमें स्वार्थ,लोभ, लालच आदि आ जाता है और इस क्रांति की अच्छाई और जरूरी मुद्दे दरकिनार हो जाते हैं.क्रांति त्रासदी का रूप ले लेती है. लेखक ने उपन्यास फंतासी शैली में लिखा है.

 

लेखक ने उपन्यास एनिमल फार्म की कहानी ज्यादा घुमा फिराकर बिल्कुल नहीं दी है. यह एकदम सरल और सीधी कहानी है. इस कहानी में मेनर फॉर्म के  मिस्टर जॉन है; जो वहां के जानवरों की देखरेख करते हैं, लेकिन सभी जानवर उनसे काफी परेशान रहते हैं. इन जानवरों मैं सूअर, घोड़ा, कुत्ता, बिल्ली,गाय,  चूहे आदि शामिल है. पुस्तक में सूअरों को बाकि जानवरों से बुद्धिमान कहा गया है. जानवरों में दो युवा सूअर शामिल है जिनका नाम स्नोबॉल और नेपोलियन है.

यह दोनों बाकि जानवरों को भड़काने का काम करते हैं. इनकी बातों में आकर बाकी जानवर विद्रोह कर देते हैं और सत्ता मिस्टर जॉन के हाथ से निकलकर जानवरों के हाथ में आ जाती है. सभी जानवर अपने मन के मुताबिक रहने,खाने व खेलने लगते हैं कह सकते हैं कि वह अपनी जिंदगी पूरी आजादी के साथ  जीने लगते हैं. युवा सूअर नेपोलियन और स्नोबॉल कुछ सिद्धांतों का निर्माण करते हैं जिनका पालन हर जानवर को करना होता है.नियम कुछ इस प्रकार हैं जिन्हें पढ़कर आप अपने आप को हंसने से रोक नहीं पाएंगे.

नियम:जो भी दो पैरों से चलेगा वह शत्रु है, कोई भी जानवर कपड़े नहीं पहनेगा, शराब का सेवन कोई भी जानवर नहीं करेगा, एक दूसरे के साथ लड़ाई नहीं की जाएगी लेकिन सत्ता जैसे ही हाथ में आती है किसी भी नियम का पालन नहीं किया जाता यानी कहा जाता है ना कि नियम तो टूटने के लिए ही बनते हैं कुछ ऐसा ही हुआ. लेखक ने इस तरह सूअर की तुलना नेताओं से की है कि जैसे वह लोग सत्ता में आने के बाद सभी नियम-कानून भूल जाते हैं उसी तरह जानवरों ने किया. यानी जानवर और सत्ताधारी लोग बराबर है.

इसे समझाने के लिए लेखक ने पुस्तक में जानवरों के माध्यम से और भी कई उदाहरण दिए हैं. पुस्तक में तो यहां तक दिखाया गया है कि सत्ता पाने के बाद सूअर की हिफाजत के लिए कुत्ते पालते हैं ताकि जानवर उन से डर कर रहे. इसी तरह सत्ताधारी इंसान भी करते हैं.  मजेदार किस्सा तो वह है जब सूअरों द्वारा अफवाह फैलाई जाती है कि इंसान फिर से जानवरों पर कब्जा करने वाले हैं. उपन्यास में कई जगह सत्ता मैं आए लोगों का मजाक उड़ाया गया है लेकिन आप जब आज की स्थिति और पुस्तक की कहानी की तुलना करेंगे तो आप यही अपने सामने पाएंगे; कुछ लोग मिलकर सारी नीतियां बनाते हैं, उन्हें लागू करते हैं,अपना भरण-पोषण का ज्यादा ध्यान दिया जाता है. बाद में एनिमल फार्म का नाम बदलकर मेनर फार्म कर दिया जाता है (जो कि पहले होता है).

अंत में नाम बदलने की खुशी मैं सूअर और उनके दोस्त मिलकर जश्न मनाते हैं शराब और ताश का खेल चलता है. अचानक बाहर से शोर आने लगता है नेपोलियन बाहर जाता है.बाहर खड़े जानवर सूअर को देखते हैं,फिर इंसान को देखते हैं दोनों को एक जैसा ही पाते हैं.

 यह उपन्यास सच्चाई बयां करता है. लेखक की शैली वर्तमान और इतिहास की कई घटनाओं को छूती है. अगर आपको हिंदी में पुस्तक पढ़ना पसंद है तो आप इसका हिंदी अनुवाद पढ़ सकते हैं. इसके अनुवाद में कोई भी कमी नहीं है. आप इसे उसी दिलचस्पी के साथ पढ़ सकते हैं.

 

रेटिंग:5/5⭐⭐⭐⭐⭐


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