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पुस्तक समीक्षा: दिल्ली दरबार

पुस्तक: दिल्ली दरबार

लेखक: सत्य व्यास

प्रकाशन: हिंदी युग्म

पुस्तक समीक्षा:दिल्ली दरबार

 लेखक सत्य व्यास को नई हिंदी का लेखक कहा जाता है.इनकी पहली पुस्तक “बनारस टॉकीज”नई वाली हिंदी में लिखी गई है और पिछले सालों इसकी बिक्री काफी तेज रही है. पाठक लेखक की पुस्तक दिल्ली दरबार का इसके रिलीज होने से पहले ही इसका इंतजार कर रहे हैं.लेखक की यह किताब फार्मूला किताबों में से एक है.आज के समय में फार्मूला फिल्मों की तरह ही फार्मूला किताबों का दौर चल रहा है. इस किताब को हम ना ही अच्छा कह सकते हैं और ना ही बुरा. क्योंकि आज कि पीढ़ी हिंदी किताबों को पढ़ने में अधिक रुचि नहीं रखती.यह किताब पाठकों को अपने साथ बांधे रखती है. उपन्यास दिल्ली दरबार लोगों को अपने साथ बांधने में सफल रही है.लेखक कि यह पुस्तक दिल्ली के दो दोस्तों पर लिखी गई है.

 उपन्यास दिल्ली दरबार दो दोस्त राहुल मिश्रा और मोहित सिंह के बारे में है. राहुल को लोग पंडित कहकर भी बुलाते हैं. इस कहानी का नायक राहुल है और मोहित साइड करैक्टर और राहुल का जिगरी दोस्त. दोनों दोस्त झारखंड के टाटानगर के रहने वाले थे. वह दोनों करियर बनाने के लिए झारखंड से दिल्ली तक का सफर तय करते हैं. मोहित पढ़ने में बहुत होशियार है और अपना पूरा ध्यान पढ़ने में लगाता है, राहुल चंचल और खेलने में माहिर है उसका मन पढ़ाई से ज्यादा मौज-मस्ती में लगता है. राहुल को लगता है कि उसका जन्म सिर्फ और सिर्फ प्रेम करने के लिए हुआ है.

इस कहानी की नायिका का नाम परिधि है. परिधि, राहुल और मोहित के मकान मालिक बटुक शर्मा की बेटी है.बटुक शर्मा का अंदाज खास है वह किसी भी महफ़िल में अकेले ही रंग ज़माने के लिए काफी हैं. इसके अलावा महिका और छोटू भी कहानी के सहायक पात्र हैं.पुस्तक में राहुल और परिधि की केमिस्ट्री काफी अच्छी है. बटुक शर्मा की अंग्रेजी कमजोर है.पाठ के शुरुआत से लेकर अंत तक बटुक की खराब अंग्रेजी काफी दिलचस्प है.पाठक अपना पेट पकड़कर हंसने लगेंगे. जैसा कि आप सभी जानते हैं कोई भी लव स्टोरी इतनी आसानी से पूरी नहीं हो सकती.कई ट्विस्ट और टर्न के बाद कहानी का अंत राहुल और परिधि की शादी के साथ होता है.

 यह पुस्तक पाठकों का मनोरंजन भरपूर करती है. कहानी के कई किस्से पाठकों को हँसाने में समर्थ है लेकिन इसमें कुछ नया नहीं मिलने वाला. यह कहानी भी बाकी आम प्रेम कहानियों की तरह ही है. ऐसी कई उपन्यास आपको मिल जाएंगे जिनमें प्रेम कहानियां पढ़ने को मिलेंगी. लेकिन लेखक का कहानी रखने का तरीका अनूठा है.लेखक ने सरल वाक्य, शब्द, भाषा का प्रयोग किया है. लेखक के सभी पात्र काफी मजेदार हैं. पात्र -भाषा आपको कहानी से बांधे रखने में सक्षम है.मनोरंजन और भाषा में लेखक ने कहीं भी कमी नहीं छोड़ी.लेखक का पहला उपन्यास बनारस टॉकीज सफल उपन्यासों में से एक है. अगर यह पुस्तक किसी दूसरे विषय पर लेखक ने लिखी होती इसी भाषा और मनोरंजन के साथ तो यह पुस्तक अवश्य सफल रहती.

 रेटिंग:3/5⭐⭐⭐


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