लेखक : इन्तिज़ार हुसैन

अनुवाद :शुभम मिश्रा

पुस्तक समीक्षा : दिल्ली था जिसका नाम

यह पुस्तक इन्तिज़ार हुसैन द्वारा लिखी गई है. लेखक ने पुस्तक उर्दू में लिखी थी.इस पुस्तक का अनुवाद नहीं किया गया बस अनुवाद करने वाले ने इसे ट्रांसलेट किया.अनुवादकर्ता का नाम शुभम मिश्रा है.यह इस कहानी की खामी भी है और खूबी भी. इस पुस्तक की खूबी है कि आपको पुस्तक पढ़ते वक्त सबसे तहजीबी भाषा कही जाने वाली उर्दू भाषा पढ़ने को मिलेगी और खामी यह है कि अगर आप इस भाषा में जरा भी कच्चे हैं तो आपको ध्यान लगाकर पढ़ना होगा अगर ध्यान जरा भी छूटता है तो पूरा पेज पढ़ने के बाद भी कहानी की कई सारी चीजें छूट जाएगी.

आप जब यह किताब पढ़ना शुरू करेंगे तब शुरुआत में आपको भाषा समझने में थोड़ी दिक्कत हो सकती है लेकिन जैसे-जैसे आप किताब पढ़ते जाएंगे आपको पढ़ने में मजा आने लगेगा. पुस्तक में कई कठिन शब्द दिए गए हैं लेकिन पाठकों को इन्हें समझने के लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि पुस्तक में कठिन शब्दों के साथ उनके अर्थ भी दिए गए हैं. इससे पाठक आसानी से भाषा समझकर पुस्तक पढ़ सकता है.

पुस्तक का नाम है “दिल्ली था जिसका नाम” यह पुस्तक दिल्ली के बारे में लिखी गई है. पुस्तक में दिल्ली के बार-बार उजड़ने व बसने की बात कही गई है. यह किस्सा पुस्तक में बड़ी रोचकता के साथ लिखा गया है लोगों को यह किस्सा जानने में बड़ा मजा आएगा कि आखिर क्यों दिल्ली बार-बार उजाड़ी और बसाई गई. पुस्तक पढ़ते वक्त ऐसा महसूस होता है कि कोई कहानी सुना रहा है.

राजा-महाराजाओं के समय दिल्ली पर कई आक्रमण हुए. राजा हो या कोई और हर किसी ने दिल्ली पर राज करने के लिए कई बार आक्रमण किए और सत्ता पाने के बाद फिर से दिल्ली को बसाया. इसलिए लेखक ने कहा है कि दिल्ली को कई बार बसाया व उजाड़ा गया.अगर इतिहास पर नजर डालें तो दिल्ली को पांडवों ने बसाया था उस समय दिल्ली इंद्रप्रस्थ के नाम से मशहूर थी लेकिन आज के समय में यह भारत की राजधानी दिल्ली है.यमुना नदी दिल्ली के किनारे से होकर गुजरती है. दिल्ली पर कई शासकों ने राज किया और अपने कार्यकाल में कई इमारतें और भवनों का निर्माण कराया और दिल्ली को बसाने में अपना योगदान दिया.

दिल्ली को बसाने वाले तो कई थे लेकिन उजाड़ने वालों की संख्या भी कम नहीं थी. कई शासक दिल्ली से अपना राज काज समेटकर कहीं और चले गए;जैसे तुगलक जो देवगिरी जाकर बस गया,अकबर जिसने अपनी राजधानी आगरा घोषित की लेकिन हम यह नहीं कह सकते कि दिल्ली आम शहर है क्योंकि इस शहर में कई शासकों को यहां राज करने पर मजबूर किया. हम कह सकते हैं कि दिल्ली में कुछ ऐसा है जो शासकों को यहां खींचता है.अपनी बेगम की याद में ताजमहल का निर्माण कराने वाले शाहजहां आगरा छोड़ दिल्ली का शाहजहानाबाद के नाम से पुनर्निर्माण कराया और मशहूर मुगल मयूर सिंहासन की स्थापना की.

अंग्रेजों ने भी अपनी पहली राजधानी कोलकाता छोड़ दिल्ली को अपनी राजधानी घोषित किया.बाद में दिल्ली आजाद भारत की राजधानी बनी. दिल्ली दुनियाभर में मशहूर है. यहां कई ऐतिहासिक इमारतें है. जिनका निर्माण दिल्ली के शासकों ने कराया जैसे हौजरानी ,कुतुब मीनार,लाल किला आदि.

यह पुस्तक दिल्ली के हर पहलू को पाठकों के सामने रहती है चाहे वह दिल्ली के अलग-अलग रंग हो ,बाजार हो, खाना या यहां रहने वाले लोग इन सभी का पुस्तक में विस्तृत वर्णन है. अगर आपको दिल्ली का इतिहास जानने में रुचि है तो यह आपके लिए बिल्कुल सही पुस्तक है .यह पुस्तक आपको एक बार तो जरूर पढ़नी चाहिए. इस पुस्तक के जरिए आप दिल्ली के गली-मोहल्ले तक से परिचित होंगे. किताब पढ़ते वक्त आपको उर्दू की नजाकत व नफासत से मोहब्बत हो जाएगी. किताब पढ़ते वक्त जल्दबाजी की तो कई चीजें जानने से रह गए.

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About the Author

Preeti

A resident of the beautiful city Delhi, Pursuing Journalism at Kalindi College. Love to read and write!

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