बरसात के मौसम में न खाएं मछली, नहीं तो इस तरह सेहत पर पड़ेगा बुरा असर

इस समय पूरी दुनिया महामारी कोविड-19 नामक कोरोनावायरस से जूझ रही है। अभी तक इस महामारी पर काबू नहीं पाया जा सका है। इस महामारी से बचने के लिए हमें स्वयं अपनी सुरक्षा करनी है और साथ ही साथ बदलते मौसम के साथ हमें यह भी देखना है कि हमें किस चीज का सेवन करना है और किस चीज का नहीं। क्योंकि बदलते मौसम के साथ हमारे स्वास्थ्य में भी बदलाव आता है।

ऐसे में अगर हम कुछ अटपटा खाते हैं, जो उस मौसम के अनुकूल नहीं है तो इससे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर पड़ता है। जैसे बारिश के मौसम में हमें ज्यादातर सर्दी, खांसी, जुकाम, जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। बारिश के मौसम में हमें ऐसी चीजें नहीं खानी चाहिए जो हमारे स्वास्थ्य पर असर डालें।

बरसात के मौसम में न खाएं मछली

हर मौसम में हमें खाना  मौसम के अनुसार ही खाना चाहिए कि इस मौसम में क्या हमारे शरीर को फिट बैठता है क्या नहीं बैठता। ठीक इसी प्रकार बारिश के मौसम में हमें मछली का सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि मछली का सेवन करने से हमारे शरीर को कई प्रकार से फायदे मिलते हैं।

ज्यादातर मछली का सेवन करने से हमारे जो जोड़ों की प्रॉब्लम होती हैं, जैसे घुटनों का दर्द आदि समस्याएं मछली खाने से धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं। लेकिन बरसात के मौसम में मछली खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि आखिरकार बरसात के मौसम में मछली खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार से घातक सिद्ध हो सकता है!

आपके दिमाग में यह बात तो घूम रही हो कि आखिरकार हमें बारिश के मौसम में मछली खाने से मना क्यों किया जाता है। इसके पीछे क्या कारण है, जो हमें डॉक्टर या कोई विशेषज्ञ मछली खाने के लिए खासकर बरसात के मौसम में मना करते हैं। दरअसल इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है।

जब बारिश होती है तो जितने भी जल के स्रोत हैं जैसे तालाब, नदी, कुआं, या समुद्र इन सब जगहों पर किसी ना किसी प्रकार से गंदगी चलकर पहुंच जाती है। ऐसे में बहते हुए बारिश के पानी में कुछ हानिकारक बैक्टीरिया या वायरस  भी शामिल होते हैं और अगर नहीं होते भी तो इस मौसम में पनप जाते हैं।

जब बरसात का पानी नदी तालाब या किसी अन्य जल स्रोतों में पहुंचता है तो उसके साथ ढेर सारी गंदगी भी जाती है और साथ ही साथ बरसात के मौसम में कीड़े मकोड़े भी जन्म लेते हैं, ऐसे में मछलियां भी इन्ही कीड़े मकौड़ों को अपना शिकार बनाती हैं। बारिश के समय जो बैक्टीरिया या वायरस नदी या तालाब में आते हैं और मछलियां जब इन खतरनाक बैक्टीरिया या वायरसों का सेवन करती हैं तो इन बैक्टीरिया या खतरनाक वायरसों में ऐसे जहरीले पदार्थ होते हैं जो मछली के शरीर में पहुंच जाते हैं।

मछलियों में यह खतरनाक पदार्थ तब तक रहते हैं जब तक हम इनका सेवन नहीं करते। ऐसे में मछली में मौजूद विषैला पदार्थ जो मछली ने बैक्टीरिया से खा कर लिया था और जब हम मछली को खाएंगे तो मछली के द्वारा वह खतरनाक विषैला पदार्थ हमारे शरीर में प्रवेश कर जाएगा।

मछली खाना पड़ सकता है, महंगा!

अगर शोधकर्ताओं की मानें तो शोधकर्ताओं के अनुसार यह विषैले पदार्थ जो बरसात में मछली खाने से हमारे शरीर में आ जाते हैं वह हमारे शरीर को फूड प्वाइजनिंग का शिकार बना देते हैं या बना सकते हैं। जिसके कारण आपको डायरिया, उल्टी और बुखार, गले में सूजन,  जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। तो, ऐसे में बरसात में मछली खाना हम सब को महंगा पड़ सकता है।

अगर आप बारिश के मौसम में मछली खाना ही चाहते हैं तो मछली को खाने लायक बनाने से पहले उसे खूब बढ़िया से धुले और उसे 2 बार गर्म पानी में उबालें और मछली को अच्छी तरह से पकाएं और अच्छी तरह से पकाने के बाद ही बरसात के मौसम में मछली का सेवन करें।

दोस्तों अगर आप अपनी सेहत को लेकर चिंतित हैं और आप मछली के शौकीन हैं तो मैं आपसे यही गुजारिश करूंगा कि बरसात का मौसम निकल जाए उसके बाद आप खूब अच्छे से मछली खाएं। लेकिन अगर आपको अपने हेल्थ के बिगड़ने का डर लग रहा है तो बरसात के मौसम में मछली ना खाएं ।

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