बौना तीरंदाज – जातक कथा

बहुत समय पहले की बात है कि एक बार एक गांव में एक बौना रहता था। उसने तक्षशिला के एक महान गुरु से धनुर्विद्या प्राप्त की थी। रोज-रोज अभ्यास से वह खुद भी एक कुशल धनुर्धर बन गया था। लेकिन अपनी जीविका, चलाने के लिए वह जब भी किसी राज्य में जाया करता था, तो उसकी योग्यता को जाने बिना ही उसके कद को देखकर, ही सब उसका मजाक बनाने लगते थे। फिर एक दिन उसने एक तरकीब निकाली उसने एक हष्ट पुष्ट जुलाहे को ढूंढा जिसका नाम भीमसेन था। उसने उसके सामने अपने युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया और उसे एक सेनानी बनने की सलाह दी।

बौने तीरंदाज उससे कहा कि-“तुम सिर्फ मेरी सलाह मानते रहो। मैं तुम्हारे अनुचर के रूप में हमेशा तुम्हारे पीछे खड़ा रहूंगा। तुम्हें बस अपना जौहर दिखाना है।”

उसने आगे कहा कि-” तुम एक राजा के पास एक सेनानी की नौकरी मांगने जाओ।”

भीमसेन ने बिल्कुल वैसा ही किया। राजा ने भी भीमसेन को बस उसकी लंबाई चौड़ाई देखकर एक सरदार की नौकरी दे दी।

अब जब भी कभी राजा भीमसेन को कोई कार्य करने के लिए देता तो बौना उसके अनुचर के रूप में उसका सारा काम पूरा कर देता।
राजा और बाकी सब लोगों को यही लगता था कि भीमसेन ने यह काम किया होगा। भीमसेन बड़ा बुद्धिमान और महान योद्धा है।

भीमसेन को तो बिना कुछ काम किए ही धन और यश की प्राप्ति होने लगी, इसलिए उसे अपने ऊपर बहुत घमंड हो गया था और अब तो वह बौने को अपने मित्र के रूप में देखता भी नहीं था। वह बौने को अपना एक नौकर समझा करता था। हमेशा उसकी निंदा और उपेक्षा किया करता था।

बौने को भीमसेन का यह व्यवहार बहुत अपमानजनक लगता था इसलिए बौने ने अपने मन में सोचा कि वह भीमसेन द्वारा की गई इस निंदा का मजा तो भीमसेन को जरूर चखाएगा।

संयोगवश ही उनके पड़ोसी राज्य ने उनके राज्य पर हमला कर दिया और राजा ने भीमसेन को एक महान और बुद्धिमान योद्धा समझ कर, सेना का नेतृत्व उसे ही सौंप दिया।

भीमसेन एक विशाल हाथी पर सवार होकर, बौने को अपने पीछे बिठाकर युद्ध करने चल पड़ा पर जैसे ही वह आगे बढ़ रहा था, शत्रु की सेना उसके और करीब आती जा रही थी। जिससे उसे बहुत डर लग रहा था और वह काँपते हुए नीचे गिर पड़ा। बौना बहुत ही देशभक्त और वफादार किस्म का सेनानी था इसलिए उसने युद्ध की कमान अपने हाथों में थाम ली और शत्रुओं का वध करते हुए आगे निकल गया।

उसका इतना कुशल पराक्रम देख कर शत्रु सेना हार गई और रणभूमि छोड़कर भाग खड़ी हुई। यह बात जब राजा के पास पहुंची तो राजा ने बौने को उसका पराक्रम देखकर उसे अपना सेनापति नियुक्त किया।

सीख

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें ज्ञान को ज्यादा महत्व देना चाहिए। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई कैसा दिखता है, कोई कितना लंबा है ,या कितना छोटा है ,उसका ज्ञान और पराक्रम ही उसे महान बनाता है। займ на карту срочно без отказа


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