फलों की बागवानी से सालाना लाखों रुपए कमाने वाले सतबीर की कहानी

हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं, जो भगवान को नहीं मानते। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें लगता है कि भगवान इस दुनिया में मौजूद हैं। लोग भगवान में विश्वास रखते हैं और बड़ी-बड़ी मूर्तियां और मंदिर बनाकर उनकी पूजा भी करते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि अगर भगवान इस दुनिया में मौजूद हैं, तो वह सिर्फ तीन रूपों में। सैनिक डॉक्टर और किसान। सही मायने में यह भगवान के ऐसे तीन रूप हैं, जिनकी वजह से आज हमारा देश और हम सब सुरक्षित हैं। भगवान का पहला रूप सैनिक के रूप में देश की रक्षा करता है। दूसरा डॉक्टर के रूप में देश के लोगों की जान बजाता है। और तीसरा किसान के रूप में पूरे देश का पेट भरता है। भगवान के इन तीनों रूपों के बिना हमारा और हमारे देश का जीवन संभव नहीं है।

इन तीनों रूपों में किसान एक ऐसा वर्ग है, जो डॉक्टर, सैनिक के साथ-साथ पूरे देश का पेट भरता है। लेकिन फिर भी हम अक्सर सुनते हैं कि कई किसानों ने आत्महत्या कर ली। पूरे देश का दायित्व अपने कंधे पर ढोने वाले किसान वर्ग की ऐसी दशा असहनीय है। फसल उगाने के लिए किसान अक्सर कर्ज में डूब जाते हैं, और जब फसल बिकती है तो मुनाफा ना होने की वजह से वह परेशान हो जाते हैं और उनकी यही परेशानी उन्हें आत्महत्या के रास्ते पर ले कर चली जाती है। इन सब के बावजूद कुछ किसान ऐसे भी होते हैं जो नई तकनीक, सोच और कोशिश के बल बूते पर कीर्तिमान स्थापित करते हैं। आज हम एक ऐसे ही किसान के बारे में जानेंगे, जिन्हें लोग ‘बेर वाले अंकल’ कह कर पुकारते हैं।

हरियाणा के अहिरका गांव में रहने वाले सतबीर पुनिया को उन किसानों की श्रेणी में रखा जा सकता है, जिन्होंने अपने बलबूते अपनी एक अलग पहचान बनाई है। एक तरफ जहां किसान कई तरह की फसलें उगा कर भी कर्ज में डूबे रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ सतबीर सिर्फ कुछ फलों की बागवानी करके साल में लाखों रुपए कमा रहे हैं। देश को मजबूत बनाने की दिशा में एक किसान का समृद्ध होना बहुत जरूरी है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि अपनी लागत से ज्यादा मुनाफा ना होने की वजह से आज देश के अधिकतर किसान कर्ज में डूबे हुए हैं। उन्हें कर्ज के साथ-साथ मौसम की मार और महंगाई भी झेलनी पड़ती है। इन सबके बावजूद कुछ किसान ऐसे भी होते हैं जो समृद्ध बने रहते हैं। सतबीर भी उन्हीं किसानों में से आते हैं, जो साल में लाखों रुपए कमाते हैं। लेकिन जरूरी नहीं कि समृद्धि हर किसान के घर का रास्ता देखे, क्योंकि हम सबकी किस्मत एक जैसी नहीं होती।

कुछ किसान ऐसे होते हैं जो दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं, और कुछ ऐसे भी होते हैं जो खुद की जमीन पर खेती करते हैं। सतबीर भी ऐसे किसानों की सूची में आते हैं जो खुद की जमीन पर खेती करते हैं। 57 साल के सतबीर ने बताया कि उनके पास 16 एकड़ जमीन है। जब उनसे उनकी लाखों की कमाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपनी कहानी बताई।

किसानों की परेशानी सतबीर की जुबानी

सतबीर ने बताया कि वह भी पहले अन्य किसानों की तरह अपनी जमीन पर खेती करते थे। नौकरी ना मिलने की वजह से उन्होंने खेती-बाड़ी को ही अपना नौकरी बना लिया था। उन्होंने बताया कि किसानों की जिंदगी आसान नहीं होती। उन्हें कई परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कई बार ऐसा भी होता है कि उनके पास फसल उगाने के लिए बीज नहीं होते, और बीज खरीदने के लिए पैसे भी नहीं होते। बीज खरीदने और फसल उगाने के लिए उन्हें जमींदारों या किसी अन्य लोगों से कर्ज लेना पड़ता है। उन्हें उम्मीद रहती है कि जब फसल तैयार हो जाएगी तो वह इसे बेचकर अपना कर्ज चुका देंगे। लेकिन कई बार उनकी किस्मत उनका साथ नहीं देती। फसल तैयार होने से पहले ही कभी-कभी मौसम की ऐसी मार झेलनी पड़ती है कि फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाती है।

परेशानियां यहीं रुकने का नाम नहीं लेती। मौसम की मार से बचने के बाद जब फसल तैयार हो जाती है, तो किसान उसे बेचने की फिराक में लग जाते हैं। फसल बेचने के क्रम में भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्हें अपनी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पाता। कर्ज में डूबा हुआ किसान अपनी सरकार से मदद की गुहार लगाता है, लेकिन जब सरकार से भी उसे कोई मदद नहीं मिलती तो उसे अपनी जिंदगी खत्म करना ही उचित लगता है।

प्रधानमंत्री मोदी की बातों से हुए प्रेरित

आज के समय में साल में लाखों की कमाई करने वाले सतबीर की जिंदगी में भी एक ऐसा समय आया था, जब उन्हें खेती में नुकसान सहना पड़ा था। उन दिनों को याद करके सतबीर कहते हैं कि वह भी अन्य किसानों की तरह अपनी जमीन पर खेती करते थे। फसलों को तैयार होने के लिए पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन उनके इलाके में पानी की पर्याप्त मात्रा ना होने की वजह से फसलें बर्बाद हो जाती थी। खेतों में फसलों तक पानी पहुंचाने के लिए उन्हें अधिक लागत लगानी पड़ती थी। लेकिन जब फसलों को बेचा जाता था तो मुनाफा बहुत कम होता था। इससे परेशान होकर सतबीर ने खेती करना छोड़ दिया। उन्होंने अपना खेत दूसरे किसानों को किराए पर दे दिया और खुद दूसरे कामों में लग गए।

एक दिन उन्होंने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की बातें सुनी, जिसमें मोदी जी ने खेती में दूसरे विकल्पों के जरिए फलों की बागवानी करके मुनाफा कमाने के उपायों के बारे में बताया। उनकी बातों से प्रेरित होकर सतबीर ने भी फलों की बागवानी करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपनी जमीन पर अमरूद, थाई प्रजाति के बेर और नींबू के पौधे लगाए। उनकी कोशिश रंग लाई और धीरे-धीरे फलों की बागवानी से उन्हें मुनाफा होने लगा।

आज की स्थिति

फलों की बागवानी करके आज सतबीर ने एक अनोखा मुकाम हासिल कर लिया है। उनके फलों और फसलों को बाजार में अच्छा मूल्य मिलता है। आज सतबीर और उनके फलों का बगीचा इतना मशहूर हो गया है कि इसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। पिछले साल हरियाणा के कृषि मंत्री ने उन्हें इस काम के लिए सम्मानित भी किया। सतबीर की इस कामयाबी ने राज्य स्तर पर उनकी एक अलग पहचान बनाई है।

सतबीर की तरह ही ऐसे कई किसान है जिन्होंने नई तकनीक और अपनी कोशिशों के बलबूते अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे किसान भी है जो कर्ज में डूबे हुए हैं। देश के अन्नदाता की ऐसी ही कहानियों को जानने के लिए बने रहे हमारे साथ। सतबीर की यह कहानी अगर पसंद आई हो तो इसे दूसरे लोगों तक भी पहुंचाएं।

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