मुरादाबाद के किसान कमल की खेती से हो रहे हैं मालामाल, जानिए क्या है फार्मूला

कृषि का कार्य एक बहुत ही मेहनती काम है। कृषि एक ऐसा प्रोफेशन है जो मेहनत के साथ-साथ व्यक्ति के धैर्ये का भी इम्तिहान लेता है। मानव या यूं कहिए कि हर जीव की प्रकृति है, आसान पथ का अनुसरण कर अपने आप को कम्फरटेवल जोन में रखने की। रिस्क लेकर कुछ अलग करने की शक्ति कुछ ही लोगों में होती है और यही वे लोग होते हैं जो भेड़चाल में न फस कर सफलता का पथ अपने दम पर बनाते हैं। नये काम में रिस्क लेकर सफलता तक पहुंचने में कठिन मेहनत के साथ-साथ कई नयी मुश्किलों का सामना भी करना होता है। पर इन वाधाओं को पार कर सफलता का स्वाद भी मधुर और आत्म संतुष्टि से भरा होता है।

कमल की खेती से कमाएं 50 हजार प्रति हेक्टेयर

तो आईए हम बात करते हैं उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के मोढ़ा तेहिया गांव के उन किसानों की जो ट्रेडीशनल खेती से कुछ अलग कर आत्मनिर्भर बनकर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। इन किसानों ने ट्रेडिशनल खेती जैसे धान, गेहूं और विभिन्न प्रकार की सब्जियों से अलग बाजार में कमल की मांग को देखते हुए कमल के फूल की खेती करना शुरू किया और देखते-देखते अच्छा खासा मुनाफा कमाकर एक सफल कैरियर की शुरुआत की।

ऐसी मान्यताऐं थी कि कमल का फूल कीचड़ में ही खिलता है तो कमल के फूल की खेती कीचड़ में होती है। पर कमल की खेती मटमैले पानी में‌ भी हो जाती है। मोढ़ा तेहिया गांव के किसानों का कहना है कि वैसे तो हर समय कमल के फूलों की मांग रहती है पर त्यौहारों पर कमल के फूलों की मांग नवरात्रि और दीवाली पर विशेष रुप से अधिक रहती है। एक फूल की कीमत 15 – 20 रुपये और खेती में 8-10 हजार रू की लागत पर 40-50 हजार रू का मुनाफा होता है। मांग थोक में होने के कारण खेती कई एकड़ जगह में होती है। वैसे तो किसानों के पास झील का ठेका होता है पर जिनके पास नहीं, वे खेतों में पानी भरकर कमल की खेती करते हैं।

ज़्यादातर फसल का कुछ भाग या कहिए एक – दो भाग ही हमारे लिए उपयोगी होते हैं। पर कमल की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका हर भाग उपयोगी है। यही वजह है कि मुरादाबाद के किसानों के लिए कमल के फूल की खेती “मील का पत्थर” साबित हुई।

कमल के पौधे के मुख्य भाग निम्न हैं:

  • फूल
  • पत्ती
  • तना
  • जड़
  • बीज

तो आईए हम कमल के पौधे और इसके सभी भागो के महत्व व उपयोग पर चर्चा करते हैं। कमल के पौधे का प्रत्येक भाग आयुर्वेद चिकित्सा में प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद के अलावा सामान्य रुप में इसके अनेक उपयोग हैं।

फूल :

भारत का राष्ट्रीय फूल कमल है और प्राचीन काल से कमल के फूल का आध्यात्मिक महत्व भी है। पूजा में कमल के फूल को भगवान को अर्पित करना हमारी सभ्यता का एक मुख्य अंश है। दीपावली और नवरात्री पर तो बिना कमल के फूल के पूजा अधूरी सी प्रतीत होती है। फूलों की तरह कमल के फूल की सुगंध बहुत ही बेहतरीन होती है।

बीज :

कमल के बीज का आयुर्वेद और एलोपैथिक चिकित्सा में एक अपना विशिष्ट स्थान है।

जड़ :

कमल की जड़ को कई नामों से पुकारा जाता है। उनमें से एक बहुतायात उपयोग होने वाला नाम है – कमल ककड़ी। पंजाब में यह सब्जी के रुप में प्रयुक्त की जाती है। साथ ही साथ में आयुर्वेद चिकित्सा में भी उपयोग की जाती है।

तना :

कमल के पौधे के तने को कमल नाल भी कहते हैं। आयुर्वेद चिकित्सा में बहुत उपयोगी है। गर्भस्त्राव जैसी बिमारी में लाभकारी है।

पत्ती:

कमल के पत्ते पूरे तरह से गोलाकार होते हैं। चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने के लिए कमल के फूल की पंखुड़ियों के साथ पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरा सुंदर व कोमल बनता है।

अब बताइए जिस पौधे के हर भाग की डिमांड हो और इसे उगाने व रखरखाव में भी कम मेहनत के बाबजूद बढ़िया मुनाफा हो तो क्यों न कमल के फूल की खेती की जाय?

इस अचंभित करने वाली खबर को सुनकर कमल की खेती या घर में भी कमल के फूल को उगाने की बात ने आपको निश्चित ही आकर्षित किया होगा। अत: हम आपको कमल की खेती के बारे में विस्तार से बताते हैं।

कमल के बीज से पौधा उगाना

  • खेतों को तालाब का आकार देकर बारिश में बारिश का पानी खेतों में भरें।
  • बीजों को अंकुरित
  • नन्हे पौधों को कीचड़ में लगाना

बीजों को अंकुरित करना

कमल के बीज सामान्य बीजों से भिन्न तरीके से अंकुरित होते हैं। बीज के नुकीले सिरे को खिस दें। इसे फाइल करना भी कहते हैं। गुनगुने पानी में फाइल किये हुए बीज डाल दें। हर तीन दिन बाद पानी बदलें। कुछ दिनों में ही बीज अंकुरित हो जायेंगे।

नन्हे पौधों को कीचड़ में लगाना

अंकुरित बीज लम्बी-लम्बी टहनियों के साथ गीली मिट्टी से भरे गमले में शिफ्ट करें। बीज मिट्टी में तथा टहनियां बाहर होनी चाहिए। कुछ समय बीतने के बाद पानी से भरे थोड़े बड़े गमले में कमल के नन्हें टहनियों बाले पोधे को शिफ्ट करें। पत्तियां आने के बाद इसे बड़े टब या पॉट में शिफ्ट करें। इस बड़े बर्तन में पानी ऊपर तक भर दें। कुछ समय बाद मटमैले पानी में घुली मिट्टी बर्तन के धरातल में बैठ जायेगी और पानी बिल्कुल पारदर्शी हो जायेगा।

कमल के फूल धूप में खिलने बाले पौधे होते हैं अत: इन्हे पर्याप्त प्रकाश मिलता रहे।

कमल की खास बात यह है कि एक बार पौधा लगाने के बाद ये सालो साल तक चलते हैं। एक बार लगाईए और सालों साल तक अपने घर आंगन और खेतों को कमल की खुशबू से महकाने के साथ‌-साथ इसके आयुर्वेद चिकित्सा में उपयोग के कारण अच्छा खासा मुनाफा कमा कर मुरादाबाद के किसानो की तरह अपना कैरियर सवारिये।

यदि आप भी कमल की खेती या घर में कमल के फूल को लगाने पर विचार कर रहें हैं तो जरूर ही जल्दी शुरू कीजिए और निश्चित ही लक्ष्मी माता आपको समृद्धि प्रदान करेंगी।

जग माँही ऐसे रहो, ज्यों अंबुज सर माहिं।

रहै नीर के आसरे, पै जल छूवै नाहिं।

~ चरणदास ने कहा है कि इस संसार में कमल की तरह रहो; जैसे जलाशय में कमल रहता सिर्फ पानी के सहारे फिर भी कमल का फूल जल को छूता नहीं है।

अगर आप भी चाहते हैं कि आपके किसान दोस्त या रिश्तेदार एक सफल कैरियर बनायें तो उनसे इस पोस्ट को जरूर साझा कीजिए। कमल की तरह ही निस्वार्थ भाव दूसरों के हित के लिए महक कर जग के कल्याण में लग जाईए। अधिक जानकारी के लिए कमेंट करना न भूलें। быстрые займы на карту


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One response to “मुरादाबाद के किसान कमल की खेती से हो रहे हैं मालामाल, जानिए क्या है फार्मूला”

  1. BhagyaShree Chaudhary Avatar
    BhagyaShree Chaudhary

    बहुत ही ज्ञावर्धक जानकारी है आज पता चला कि कमल का फूल सिर्फ उसकी सुन्दरता के लिए ही नहीं बल्कि उसके गुणों की वजह से उसको भारतीय संस्कृति में इतना उच्च कोटि पर स्थापित किए है।

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