जब गुरुनानक देव ने अत्याचारी सुल्तान को सही राह दिखाई

जब हम अपने आसपास देखते हैं, तो हमें विकास की ऐसी बुनियाद दिखाई देती है जिसकी हमारे पूर्वजों ने कल्पना भी नहीं की होगी। आसमान में उड़ते हवाई जहाज़, चौड़ी सड़कें, तेज गति से भागती हुई रेलगाड़ी, ये विकसित विज्ञान के तमाम ऐसे उदाहरण हैं जिनका हम अपनी निजी जिंदगी में हर रोज लाभ उठाते हैं। विज्ञान के साथ साथ कुछ और भी चीजें है, जिनमें निसंदेह विकास हुआ है। पहले के समय में दास प्रथा, जाति प्रथा, दहेज़ प्रथा इत्यादि ऐसी अनेक दमनकारी प्रथाएं थीं जो समाज को नुकसान पहुंचाती थी। लेकिन समय में बदलाव के साथ इन समस्याओं में भी कमी जरूर आई है।

इन सबके बावजूद कुछ समस्याएं ऐसी भी हैं, जिन्हें हम आज भी देखते और महसूस करते हैं। वो समस्याएं है अमीरों द्वारा गरीबों का, ताकतवर द्वारा कमजोर लोगों का दमन। अगर ऐसा काम कोई अशिक्षित व्यक्ति करता तो हम सोच सकते थे कि उसके पास ज्ञान नहीं है, इसलिए वह ऐसा कर रहा है। लेकिन जब कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति ऐसा करता है तो कोई फायदा नहीं उसके शिक्षित होने का। ऐसा नहीं है कि यह सब आज के समय में ही हो रहा है। पहले समय में भी ऐसा हुआ करता था।

एक बार गुरुनानक देव बगदाद गए थे। वहां का राजा बड़ा अत्याचारी था। वह अपनी ही जनता की संपत्ति को लूट लेता था। जब उसे पता चला कि गुरुनानक देव बगदाद में हैं, तो वह उनसे मिलने पहुंचा। जब सुल्तान वहां पहुंचा तो गुरु नानक देव ने उससे कहा कि आप मेरे 100 पत्थर गिरवी रख लीजिए। सुल्तान राजी हो गया, लेकिन उसने पूछा कि आप इन पत्थरों को वापस कब ले जाएंगे? गुरु नानक देव ने कहा कि मेरी मृत्यु आपसे पहले होगी। इसलिए जब आप मरने के बाद मुझसे मिलेंगे तब आप यह पत्थर मुझे वापस कर देना।

सुल्तान आश्चर्यचकित होकर बोला कि यह कैसे संभव है? मरने के बाद मैं पत्थरों को अपने साथ कैसे ले जा सकता हूं। तब गुरुनानक देव ने कहा कि तब आप जनता की संपत्ति क्यों लुटते हैं? उन्हें भी तो आप यही छोड़कर जाएंगे। यह सुनकर सुल्तान की आंखें खुल गई। उसने गुरुनानक देव से क्षमा मांगी। गुरु नानक देव ने कहा कि आप हमसे क्षमा न मांगे, अपनी जनता से क्षमा मांगे। सुल्तान ने ऐसा ही किया और फिर उसने कसम खाई कि वह कभी भी किसी को परेशान नहीं करेगा। वह अपनी जनता का ध्यान रखेगा।

परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो, हमें कभी भी किसी कमजोर, गरीब और बेसहारा लोगों का दमन नहीं करना चाहिए। एक दूसरे की मदद और सभी को प्यार करके ही हम अपने समाज और देश को सर्वोपरी बना सकते हैं। займ на карту


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