एक किलो का एक अमरूद और दाम है 500 रूपये!

हमारे स्वास्थ्य के लिए फल और सब्जियां बराबर मात्रा में अति आवश्यक है। परंतु, अगर हम वैज्ञानिको के हिसाब से देखें, तो फल हमारे शरीर के लिए अति आवश्यक होते हैं। इसी वजह से हमें ज्यादा से ज्यादा फल खाने को भी कहा जाता है। फलों में ढेर सारे विटामिंस होते हैं। अधिक मात्रा में पानी भी होता। जिससे की हमारे शरीर का पोषण बना रहता है।

यही नहीं उसमे और भी कई अन्य सारी चीज पाई जाती है जैसे विटामिन, मिनिरल, फास्फोरस इत्यादि। इसी वजह से फलों का व्यापार एक बहुत ही तरक्की भरा व्यापार है। कोई भी इंसान अगर इसमें जी-जान लगाकर मेहनत कर लेता है। तब वह अच्छी खासी आमदनी कमा सकता है। इसी संदर्भ में हम आपके सामने एक ऐसे किसान की कहानी लेकर आए हैं जिसने अमरूदों के साथ कुछ ऐसा चमत्कार कर दिया कि उसको ₹ 500 से ₹ 600 किलो के बीच में बेचते हैं। वह इन फलों को ऑनलाइन भी बेचते हैं।

नीरज ढांडा की जिंदगी

नीरज हरियाणा के छोटे से जिले रोहतक के निवासी हैं। वह एक किसान परिवार से नाता रखते हैं। इस चीज का उन्होंने बखूबी इस्तेमाल किया है। किसानी के साथ-साथ वह पढ़ने के बहुत शौकीन थे। इसी वजह से उन्होंने नागपुर से कंप्यूटर साइंस की फील्ड में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। जब अपने पिताजी के साथ वह कभी अगर फसल बेचने के लिए मंडी में जाते।

तब वहां पर वह बहुत सारी चीजें देख कर समझने की कोशिश करते थे। सबसे पहले तो वह यह ध्यान देते कि किसान इतनी मेहनत करने के बावजूद भी कोई फायदा नहीं उठा पाता है। लोगों तक पोषण पहुंचाने के बावजूद भी, वह खुद कुपोषित रहता है।इस वजह से उन्होंने मन में ठान ली थी कि उनको इस फील्ड में कुछ ना कुछ तगड़ा करके दिखाना है।

पैसों का इंतजाम

जिस समय वह खेती शुरू करना चाहते थे। उस समय उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे। इसी वजह से वह कोई ऐसी जगह ढूंढ रहे थे। जहां से वह पैसा बचाकर आराम से अपना बिजनेस खोल सके। इसके लिए उन्होंने जिन से 7 किलोमीटर आगे 1 जगह को चुना। वहां पर जाकर वह चेरी बेचते थे।

परंतु, इससे उनको कोई भी फायदा नहीं हुआ और उन्होंने जल्दी हीं उसको बंद कर दिया। लेकिन, वह इस काम में हार नहीं मानना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने अनेक तरकीबों के बारे मे सोचा। अंत मे उन्होंने अमरूदों का व्यापार शुरू करने की ठान ली।

अमरूद बेचने की पहल

इस बार उनकी यह सोच सफल हो चुकी थी और वह अपने बिजनेस में कामयाब थे। वह पास की नर्सरी से अमरूदों के कुछ पेड़ लेकर आए थे। फिर उन्होंने उसे उगाना शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद उनके अमरुद पक कर तैयार हो गए। अब वह मंडी में बेचे जाने के लायक थे। लेकिन, जब उन्होंने उसे मंडी में जाकर बेचा तो वह 6 से ₹7 किलो के दाम पर बिक रहे थे। जो की उनके हिसाब से बहुत कम था।

तब उन्होंने इसको महंगे करने के लिए दिमाग लगाया। वह जहां रहते थे, उससे लगे हुए शहरों में उन्होंने अमरूदों कों बेचने के लिए 6 स्टॉल खोलें। क्योंकि वह शहर में थे, इस वजह से उनके दाम भी ज्यादा थे। अब उन्होंने उस अमरुद को दुगने दामों में बेचना शुरू कर दिया था। कुछ दिन तक ऐसा चलता रहा। परंतु, इससे भी उनको सहानुभूति नहीं हुई। इसी वजह से उन्होंने एक और निर्णय लिया।

थाईलैंड वाले अमरुद

जब वह उन काउंटरों पर अपने अमरुद बेच रहे थे। तब कुछ दिन तक तो सब कुछ बढ़िया चलता रहा। परंतु, धीरे-धीरे करके उनके अमरूदों की मांग बढ़ने लगी। इसी के चलते अब उनको अपना उत्पादन बढ़ाना था। यह उनके लिए एक बहुत ही बड़ी समस्या थी। उन्होंने इस विषय पर अपना दिमाग लगाया और छत्तीसगढ़ की एक नर्सरी से थाईलैंड की वैरायटी के अमरुद ले आए।

यह अमरूद आम अमरूदों के मुकाबले में जंबो साइज के थे। उस वैरायटी के इक अमरुद का वज़न एक से डेढ़ किलो तक था। इसी वजह से उनके दाम भी वैसे ही थे और उनकी मांग भी वैसी ही थी। उनके पौधों को उन्होंने अपने खेत में लगाया और जल्दी हीं वह मार्केट में जाने के लिए तैयार हो गए थे।

जब उनको यह बात पता लगी कि इसकी डिमांड बहुत ज्यादा है। तब उन्होंने उसे हाईवे से जुड़ी हुई सड़क पर बेचने का निर्णय लिया। इस कार्य के लिए वह ऑनलाइन मार्केटिंग का प्रयोग कर रहे थे।

सफल हो गया व्यापार

उन्होंने अपने व्यापार में इस चीज का विशेष ध्यान रखा कि उनको जल्द से जल्द अपने अमरूदों को लोगों तक पहुंचाना है। आपको बता दें कि इन अमरूदों मे 10 से 15 दिन तक ताजे बने रहने की क्षमता हैं। इसी वजह से आप इनको आराम से बिना किसी दिक्कत के बेच सकते हैं। परंतु, उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने 36 घंटे के अंदर ही लोगों को अमरुद पहुंचाने का सफल प्रयास करके दिखाया।  लोगों की संख्या अब बढ़ने लगी थी और उनका व्यापार भी उसी तरीके से तरक्की को छूने लग गया था। जल्द हीं वह पूरे शहर में मशहूर हो चुके थे।

उनका सपना अब उनको पूरा होते हुए दिखाई दे रहा था। कुछ दिनों बाद उन्होंने अपनी इस तकनीक को गरीबों के साथ भी बांटा। उन्होंने उनको सिखाया कि उसको सही तरीके से कैसे उगाते हैं। आज देशभर के किसान उनके साथ मिलकर काम करना चाहते है और उनसे सीख भी लेना चाहते हैं। कुछ लोग तो उनके बागों में घूमने भी आते हैं।

उनके इस प्रयास की सफलता होने के बाद, अब वह दूसरे चीजों को भी जनता तक पहुंचाने का इंतजाम कर रहे हैं। उनमें से कुछ सामान ग्रीन टी, ऑर्गेनिक गुड इत्यादि है। उनकी लोकप्रियता होने के कारण सरकार ने उन्हें अपने फलों का स्टॉल हरियाणा के महोत्सव में भी लगाने के लिए कहा था। जिसके चलते उस महोत्सव में सबसे ज्यादा बिक्री उनके फलों की ही हुई थी।

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