अपने अचार से देश का नाम रोशन करने वाली किसान चाची की कहानी !!

अगर सुबह-सुबह नाश्ते में पराठे के साथ किसी भी तरह का अचार मिल जाए। तो फिर नाश्ता करने में अलग हीं मजा आ जाता है। नानी और दादी के हाथ से बने हुए अचार की बात अलग हीं होती हैं। लेकिन हम लोगो को काम चलाने के लिये कभी-कभी मार्केट का भी अचार खाना पड़ता है। हालांकि, मार्किट के अचार मे वह मजा नहीं आता, जो कि हाथ से बने हुए अचार में आता है। आज के समय में लोग अपनी ज़िन्दगी मे इतना व्यस्थ है कि वह अपने घर के स्वाद को भूल ही चुके हैं। उसी को याद दिलाने के लिए समाज में हमारी किसान चाची ने बहुत ही उम्दा कदम रखा है। तो आइए जानते हैं किसान चाची के बारे में और साथ ही साथ यह भी जानते हैं कि उन्होंने ऐसे क्या कमाल कर दिखाया है।

किसान चाची का अचार

चाची का असली नाम राजकुमारी देवी है। उनकी उम्र 63 साल हैं। वह बिहार के छोटे से शहर मुजफ्फरपुर में रहती है। ज्यादातर यही देखा जाता है कि औरतें घर के काम में व्यस्थ  रहती हैं। लेकिन, कुछ औरतें ऐसी भी होती हैं,  जो घर के काम करने के साथ-साथ कुछ नया भी करने की सोचती है। राजकुमारी जी ने उसी सोच को सच में बदल दिया। अपने सपने को सच करने के लिए उन्होंने एक छोटे से अचार के व्यापार के साथ शुरुआत की थी। इतने बड़े व्यापार के पीछे भी बहुत बड़ा कारण था। वह कारण यह था कि उनकी शादी के बाद उनको संतान नहीं हुई थी। इसी वजह से उनके घर वाले उनके साथ दुर्व्यवहार करते थे। कुछ समय बाद उनकी एक प्यारी सी बेटी हुई। इसके बाद भी वह उनसे खुश नहीं थे और उन्होंने उन्हें जल्द हीं घर से बाहर भी निकाल दिया था। अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए उन्होंने इस कदम को उठाया।

हाथ से बनाया हुआ अचार

यह अचार वह अपने हाथ से बनाती हैं। जब उन्होंने इस कार्य की शुरुआत की,  तब उनको साइकिल लेकर गांव-गांव घूमना पड़ता था। क्योंकि उस समय ज्यादा लोग उनको नहीं जानते थे और ना हीं उनके अचार के स्वाद को पहचानते थे। लेकिन धीरे-धीरे  उनके हाथ से बनाया हुआ अचार लोगों तक पहुंचने लगा। कुछ समय बाद वह उस स्वाद के लिए मशहूर हो चुकी थी। चाहे वह मुरब्बा हो या फिर आम का अचार ही क्यों ना हो। लोग उनके दीवाने हो चुके थे। बात इतनी बढ़ चुकी थी कि अगर कोई उनके नाम से भी अचार बेचता। तब भी लोग आंख बंद करके वह अचार ले लेते थे।

पुरषों के समाज मे औरतों की आवाज़

वह यह चाहती थी कि इस पुरुषों से भरे समाज में वह कुछ बड़ा करके दिखाएं। उनके घर की आर्थिक अवस्था भी सही नहीं थी। इसलिए उन्होंने अपने पति का साथ देने का निर्णय लिया। वह यह भी कहती हैं कि यह काम उनके लिए बहुत कठिन था। परंतु, इसमें उनके मां-बाप और पति ने उनका हर तरीके से साथ दिया।  यह बात तो सब जानते हैं कि अगर कोई नया काम शुरू कर रहा हो। और उसमें परिवार के साथ मिल जाए, तो फिर वह काम सफल होकर ही रहता है। वैसे भी आज के समाज मे ऐसी औरतों की अधिक से अधिक मात्रा मे जरुरत हैं क्योकि यह और औरतों को आसमान छूने की शक्ति प्रदान करती हैं। ऐसी औरते समाज मे महिला सशक्तिकरण को भी फैलाने मे सहायता करती हैं। जो की बहुत हीं ज़्यादा जरुरी हैं।

ऐसी औरतों को देख कर दूसरी महिलाओ को भी घर से काम करने की प्रेणना मिलती हैं। अगर हमें देश को तरक्की पर पहुंचना तो हमें औरत के बल की बहुत जरूरत हैं। क्योकि उन्ही मे ऐसी क्षमता होती हैं की वह हर चीज को मात दे सके और कठिन से कठिन समय मे भी देश की आवाज़ बन सके।

एक छोटी सी शुरुआत

उन्होंने बहुत छोटे से बजट से शुरुआत की थी। पहले तो वह पास वाले गांव में अपने अचार पहुंचाती। लेकिन जब धीमे-धीमे करके उनका बजट बढ़ता गया। तब उन्होंने अपने अचार को दूसरे गांव में भी सप्लाई करवाया।  लोग उनके अचार की तारीफ करते हुए यह भी कहने लग गए थे कि उनके जैसा अचार कोई नहीं बना सकता। ना ही उनके हाथ से बनाया हुआ अचार पूरे भारत में कही मिल सकता है। अब आप खुद ही समझ सकते हैं कि उनके हाथ से बनाया गया अचार कितना ज्यादा स्वादिष्ट होगा।

हाथ जैसा स्वाद कहीं भी नहीं

वह हमेशा से यह मानती आई हैं कि घर के स्वाद के आगे बाजार की कोई भी चीज नहीं टिक सकती। उनका यह भी कहना है कि बाजार की जो चीजें होती हैं, उसे वह  प्यार से नहीं बनाते। और ना ही उसको बनाते समय वह यह ध्यान देते हैं कि लोगों को कहीं इससे हानि तो नहीं पहुंचेगी। इसके साथ-साथ वह उन्हें महंगे से महंगे दामों में भी बेचते हैं। आज के बाजार का तो यही एक रूल हैं की:

“जितना अच्छा सामान, उतना ही महंगे उसके दाम”

परंतु,अगर माँ या कोई भी अन्य स्त्री अपने हाथ से कुछ बनाती है। तब वह अपने परिवार और सखी-सम्बन्धियों का भी ध्यान रखती है। वह इस बात पर विशेष ध्यान देती हैं की उनको वह चीज अच्छी ही लगनी चाहिए। साथ ही साथ जो भी उस चीज का सेवन करें, उनकी सेहत को किसी भी प्रकार की हानि ना पहुंचे। उन्होंने आपने अचार को लोगों तक कम से कम दामों में पहुंचाने की कोशिश की है। उसके कम दामों की वजह से ही लोग उनसे ज्यादा से ज्यादा अचार खरीद के ले जाते हैं।

एक तरफ जहां किसान खेती के माध्यम से सफल हो रहे हैं। तो दूसरी तरफ से किसान चाची अपने अचार से मशहूर हो रही हैं। इतने नेक काम के लिए  उनको पद्मश्री से भी नवाजा गया है। अंत मे उन्होंने सिर्फ इतना हीं कहा कि किसी भी कार्य को करते समय हमें गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए। अगर उसमे हमारे हिसाब से अधिक मात्रा मे गुणवत्ता है तो वह लोगों को जरूर पसंद आएगा। और लोग उसके लिए दोबारा आपके पास जरूर आएंगे। चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में क्यों ना हों।

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