क्यों जरूरी है जीवन में सकारात्मक सोच रखना?

दुनिया में कोई भी काम करने के लिए हमें अंदरूनी शक्ति की जरूरत पड़ती है और यह अंदरूनी शक्ति हमारी सकारात्मक सोच से आती है। सकारात्मक सोच उस हमसफर की तरह है, जो आपके साथ जिंदगी भर रहेगी तथा आपको सफलता तक पहुंचाने में बहुत मदद करेगी। मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है, इसमें भिन्न-भिन्न प्रकार की सोच उत्पन्न होती हैं- सकारात्मक सोच, नकारात्मक सोच, परंतु यह पूरी तरह मनुष्य के ऊपर निर्भर है कि वह किस सोच को अपनाकर अपनी जीवन गाड़ी आगे बढ़ाना चाहता है। जीवन में हमें हर वस्तु के लिए संघर्ष करना पड़ता है, बिना संघर्ष और परिश्रम के कभी कुछ हासिल नहीं होता, इस निरंतर संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है। विपरीत परिस्थितियों में हर व्यक्ति अपना आत्मविश्वास खोने लगता है, ऐसे में आत्मविश्वास को बनाए रखने के लिए सकारात्मक सोच आवश्यक है।

आज, हम अपने दर्शकों को एक कहानी के माध्यम से सकारात्मक सोच की अहमियत के बारे में बताना चाहेंगे।

एक राजा के दो पुत्र थे, जिन्हें शिकार करना बहुत पसंद था। एक दिन दोनों भाई जंगल में शिकार करने निकले। पूरे दिन शिकार करने के बाद उन्हें थकान होने लगी तो उन्होंने सोचा कि पास ही में एक नदी है, वहां जाकर आराम करें तथा अपने थकान मिटाए। दोनों भाइयों को तैरना आता था इसलिए दोनों ने नदी में जाकर नहाने का भी निश्चय किया। वर्षा ऋतु का मौसम था और नदी उफान पर थी, परंतु दोनों भाई नदी में उतरे और नहाने लगे।

तभी एक राजकुमार नहाते-नहाते, नदी की गहराई की तरफ चला गया। दूसरा भाई नदी से बाहर आ गया और किनारे पर खड़े होकर उसे आवाज देने लगा, परंतु नदी उफान पर थी और वह तैरते-तैरते थक चुका था। किनारे पर खड़े राजकुमार नेे उसकी मद्द करनी चाही, परन्तु वह कुछ नहीं पाया। वह निराश और हताश होकर किनारे पर बैठ गया।

उसको हताश देखकर डूबते हुए राजकुमार की हिम्मत टूट गई और उसे लगा कि अब वह बच नहीं पाएगा। वह बहते बहते कुछ दूर चला गया। थोड़ी देर बाद किनारे पर बैठे राजकुमार ने देखा कि वह डूबता हुआ राजकुमार एक साधु के साथ उनकी तरफ आ रहा है। उसे देखकर सब हैरान रह गए सभी पूछने लगे कि आखिर वह बचा कैसे।

तभी साधु ने उत्तर दिया, तुम लोग निराश होकर बैठ गए थे, जिसके कारण इसकी आशा टूटने लगी थी, परंतु जब यह नदी में कुछ दूर अकेला चला गया, तब इसको निराश करने वाला कोई नहीं था तब इसने भरपूर प्रयास किया और नदी के दूसरे किनारे तक पहुंच गया। इसको तो इसकी सकारात्मक सोच ने बचाया है।

अगर हम चारों तरफ निराशा और नकारात्मकता से घिरे रहेंगे, तो हमारी सोच भी नकारात्मक हो जाएगी, इसलिए हमें सदैव सकारात्मक लोगों के साथ रहना चाहिए और अपनी सोच को सकारात्मक रखना चाहिए, तभी हमें सफलता मिलेगी।

आपको यह कहानी कैसी लगी, अपनी राय हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं और इस आर्टिकल को शेयर करना ना भूले।

Cover Image: Vicky Bawangun онлайн займ


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