बैगर मिट्टी के एक कमरे के अंदर कर डाली बटन मशरूम की खेती

एक तरफ जहाँ किसान खेती छोड़ना चाहता हैं। तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी लोग हैं जोउन सब चुनौतियों पर काबू पा कर के एक नयी खोज कर रहे हैं। किसानी अपने मे हीं एक बहुत बड़ा क्षेत्र हैं। इस फील्ड मे लोगो के पास विभिन्न प्रकार के विकल्प भी होते हैं। जिसमे से वह चुन सकते हैं कि उनके लिये कौन सा सही हैं अथवा वह कौन सा काम करना चाहते हैं। कुछ लोग वही रोज की खेती पर ध्यान देते हैं, तो कुछ नया अविष्कार करते हैं। उदहारण के लिए आप रायबरेली से आनंद मिश्रा और टिहरी से विजय जड़धारी को हीं ले लीजिये। एक ने बागवान खेती अपनाई, तो दूसरे ने खेत की जुताई करें बिना हीं फसल ऊगा दी। परन्तु, आज हम आपके सामने एक ऐसे शख्स का किस्सा लेके आए हैं। जिन्होंने बिना मिट्टी के मशरूम की खेती कर डाली!

खेती को बदला एक व्यापार मे

हम बात कर रहे हैं गौतम कोडवानी की। वह मध्यप्रदेश के एक छोटे से शहर कटनी के निवासी हैं। उन्होंने मशरुम की खेती को हीं अपने लिए एक बहुत बड़ा बिज़नेस बना लिया हैं। वह मशरुम की बढ़ती मांग से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे अपना पेशा बना लिया।लेकिन उन्होंने इसको उस तरीके से अपनाया हैं, जैसा कोई सोच भी नहीं सकता। बड़ी बात तो यह हैं कि इसमें उनके ज़्यादा पैसे भी खर्च नहीं हुए हैं।

कैसे बचाये पैसे??

उन्होंने इस व्यापार को कोई बहुत बड़ी ज़मीन पर नहीं। बल्कि एक कमरे मे हीं तैयार करके दिखाया हैं। भले हीं इसमें उनके कुछ पैसे की लागत हुई हैं। परन्तु, जितना उनको इससे मुनाफा मिल रहा हैं, वो भी कम नहीं हैं। उन्होंने इसमें तकरीबन 65 लाख रुपये कि लागत लगाई हैं। और अगर मुनाफा देखा जाए तो हर किसान एक बार की फसल मे 1- 1.5 लाख तक कमा हीं लेता हैं।

कैसे उगाये मशरुम?

उन्होंने इसमें मिट्टी की जगह कोल्ड स्टोरेज का इस्तेमाल किया हैं। मशरूम उगाने के लिए उन्हें कम से कम कमरे का तापमान 14-15 डिग्री सेल्सियस रखना पड़ता हैं। वह इस कार्य मे सफाई का भी बहुत ध्यान रखते हैं। अगर सफाई पर ध्यान ना दिया जाए तो उत्पादन पर गहरा प्रभाव पड़ सकता हैं। यह प्लांट तकरीबन 10 हज़ार फुट मे बना हैं (यानि 2 एकड़ मे )। इस प्लांट को उन्होंने उद्यानिक और कृषि विभाग की देख रेख मे तैयार करवाया हैं। एक बार मे मशरूम की फसल 45 दिन मे बनकर तैयार होती हैं। इस प्लांट मे पांच अलग-अलग कमरे हैं और पांचो मे मशरूम उगाये जाते हैं। एक कमरा 1250 फ़ीट के आसपास की नाप का हैं। इसका मतलब यह हैं कि उनको अच्छा खासा उत्पादन मिल जाता होगा। उन्होंने हमें बताया कि उन्हें एक कमरे से लगभग 4 टन मशरुम मिल जाते हैं।

उन्होंने यह भी बताया हैं कि अगर आपके पास पैसे ज़्यादा हैं। तो आप ऐ.सी रूम को भी तैयार कर सकते हैं। इसमे आपको 15 लाख तक की लागत लगानी पड़ सकती हैं। ध्यान रखे कि मशरूम उगाने का सही समय सितम्बर-अक्टूबर से लेकर मार्च तक के समय के बीच मे होता हैं। साथ हीं साथ उन्होंने यह भी बताया कि अगर आप 50 ग्राम बीज का इस्तेमाल करते हैं। तो ध्यान रखे कि उसका दाम 100 रुपय तक हो सकता हैं। पर यह दाम सिर्फ बटन मशरुम के हैं। हर मशरुम के दाम अलग -अलग होते हैं।

क्या फायदा होता हैं बटन मशरुम खाने का?

बटन मशरुम विशेष गुणों से भरपूर होता हैं। इसमें विटामिन बी अधिक मात्र मे पाया जाता हैं। साथ हीं साथ इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स भी होते हैं। यह शरीर के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। यह विटामिन डी से भी भरपूर होता हैं। हमारे शरीर को मजबूत बनता हैं। साथ हीं साथ अन्य बीमारियों से लड़ने मे शरीर की सहायता भी करता हैं। यह केलेस्ट्रॉल काम करता हैं और दिल की बीमारियों से भी हमें बचाता हैं।

कौन से राज्यों से होता हैं मुनाफा?

जैसे-जैसे गौतम का व्यापार बढ़ता गया। वैसे हीं वह अन्य राज्यों के तरफ अपना बिज़नेस फैलाने लगे। शुरुआत मे तो सिर्फ उन्होंने मध्य प्रदेश मे मशरुम बेचना शुरू किया था। पर जैसे हीं उनका उत्पादन बढ़ता गया, उन्होंने 3 और राज्यों मे भी अपना मशरूम भेजना शुरु कर दिया। वह तीन राज्य उत्तराखंड(हरिद्वार), छत्तीसगढ़ (पुरी ), उत्तर प्रदेश (वाराणसी) है। उनके किसान इस मशरुम को 120 रूपये थोक के भाव पर भेज रहे हैं। उन्होंने हमें बताया कि शुरुआत के लिए उन्होंने पास पड़ने वाले राज्यों को चुना हैं। उतने मे हीं उनका अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है। परन्तु,जैसे-जैसे समय के साथ उनका उत्पादन बढ़ता जाएगा। वैसे-वैसे वह और राज्यों की तरफ भी अपने कदम रखेंगे।

क्या-क्या चाहिए होता हैं उत्पादन के लिए?

इसके लिए वह बहुत हीं खास मिश्रण का इस्तेमाल करते हैं। सबसे पहले तो वह गेहूं का भूसा लेते हैं। उसी भूसे की सहायता से वह खाद तैयार करते हैं। गेहूं से खाद तैयार करने के बाद वह इसमें मुर्गे से बनाई गयी खाद और साथ हीं साथ यूरिया मिलाते हैं। इस खाद को तैयार होने मे तक़रीबन 28 दिन का समय लग जाते हैं। इसमें आपको 3 दिन तक पानी भी डालना पड़ता हैं। इस मिश्रण को हम आम भाषा मे कम्पोस्ट भी बोल सकते हैं।

इसके लिए आपको अच्छी खासी बिजली भी चाहिए होंगी। बल्कि ऐसी बिजली की व्यवस्था जो कि आपको 24 घंटा तक सप्लाई हो सके। क्योकि इसमें ज़्यादातर काम बिजली से हीं होता हैं। अगर बिजली की व्यवस्था ना हो पाए, तो आप अपने साथ जनरेटर ज़रूर रखे। क्योकि अगर बिजली नहीं रही तो मशरूम के जलने का भी खतरा हो सकता हैं।

यह काम उन्होंने अपने चाचा लक्ष्मण पृथ्यानी के साथ मिलकर किया हैं। इस काम के लिए उन्हें शहर के प्रशासन ने भी वाहवाही दी। जिले के उद्यानिक अधिकारी ने भी उनके इस तरक्की भरे काम के लिए उन्हें खूब सहारना दी हैं। उन्होंने पूरे राज्य के किसानो की तरक्की की तरफ एक बहुत हीं अनमोल कदम उठाया हैं।

आगे आने वाले समय मे यह मशरूम उगाने का अति आवश्यक तरीका मना जा सकता हैं। यह इतना आसान होता हैं कि इस काम मे महिलाएं भी हाथ बता सकती हैं। इससे उनका रोजगार भी निकल जाता हैं और उन्हें नौकरी भी मिल जाती हैं। unshaven girl


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