मार्ग पर चलने का निर्णय स्वयं लेना पड़ता हैं

गौतम बुद्ध, एक महान व्यक्तित्व जिनके उपदेश, ज्ञान पूर्ण बाते, जीवन, शैली, सीख, सदैव ही हम सबका मार्गदर्शन करती रही है। उनके उपदेशो के माध्यम से लोगो को जीवन के रहस्य, उसे जीने का तरीका, व्यक्तित्व का निर्माण, आदर सम्मान , सुख शान्ति सभी विषयो पर लाभ प्राप्त होता रहा है।

एक दिन बुद्ध के एक शिष्य ने उनसे पूछा कि ” गुरुदेव आपको क्या लगता है, कि आपके उपदेशो से सभी लाभान्वित होते है, क्या सभी आपके दिखाए हुए मार्ग पर चल कर सुख शान्ति प्राप्त कर लेते है?”

बुद्ध इसके जवाब में अपने दूसरे शिष्य से पूछते है कि ” वत्स ! तुम बताओ तुम्हे इस विषय पर क्या लगता है ? क्या सभी को मेरे उपदेशो का फायदा मिलता है ?”
दूसरे शिष्य ने कहा ” गुरुदेव, मुझे ऐसा नहीं लगता की सभी तो इसका लाभ मिलता होगा पर कुछ तो लाभान्वित अवश्य होते होंगे। ”

इसके बाद गौतम बुद्ध बतलाते है “मैं सिर्फ लोगो को जीवन के उचित पाठ पढ़ा सकता हूँ, उन पाठों को अपने जीवन में उतारना है या नहीं और यदि उतरना है तो किस प्रकार यह निर्णय उन्ही का होता है। जीवन के सुखद सूत्रों को अपनाना व्यक्ति खुद अपने विवेक और ज्ञान के माध्यम से तय करता है। मैं सिर्फ सही और गलत में भेद बतला हूँ, उनका उचित पालन करने का दायित्व भक्त का होता है। मैं मार्गदर्शन तो कर सकता हूँ पर उस मार्ग पर चलने का निर्णय खुद व्यक्ति ही ले सकता है। ”

आगे बुद्ध कहते है कि ” जिस प्रकार अगर आप किसी को गंतव्य तक पहुंचने का रास्ता बतलाये और वह बीच मार्ग में खो जाए तो गलती आपकी नहीं उस यात्री की है जिसने सही से मार्ग का अनुसरण नहीं किया ठीक उसी प्रकार, गुरु सिर्फ मार्ग प्रशस्त कर सकता है, उसपर चलने का कार्य शिष्य को स्वयं ही करना होता है। ”

इस प्रसंग से हमे यह सीख मिलती है कि किसी भी उपदेश या सत्संग में हमे सिर्फ रास्ता दिखलाया जा सकता है, शान्ति का, सुख का , यश का, उन्नति का, पर उस रास्ते पर कब और कैसे चलना है इसका ध्यान हमे स्वयं ही रखना पड़ता है। जो इन बातो का महत्व समझ जाता है उसका कल्याण होता है, और जो नहीं समझ पाता वह इस मोह के जाल में फ़सा रह जाता है व अपनी बाधाओं को कभी दूर नहीं कर पाता। микрозайм онлайн


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